उत्तर प्रदेशवाराणसी

Varanasi : अरुण कुमार केशरी के ग़ज़ल संग्रह ‘अमानत-ए-अवाम’ का लोकार्पण, विद्वानों ने की सराहना

Shekhar pandey

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वाराणसी। अरुण कुमार केशरी की ग़ज़लें संकटों को उजागर करती है। ईमानदार ग़ज़लो की ग़ज़लें रूह की आवाज़ होती है। यह विचार आज सिगरा, मालवीय बाग कालोनी स्थित सेंटर फाॅर सनातन रिसर्च के सभागार में अरुण कुमार केशरी के ग़ज़ल संग्रह ‘अमानत-ए-अवाम ‘ के विमोचन पर विद्वानों ने व्यक्त किए। मुख्य अतिथि अवकाश प्राप्त न्यायाधीश ग़ज़लकार चन्द्रभाल ‘सुकुमार ने कहा कि यह ग़ज़ल संग्रह पाठकों के दिलों को छूने और सोचने पर मजबूर करने में सक्षम है। वरिष्ठ पत्रकार और पूर्व कुलपति प्रो राममोहन पाठक ने कहा कि अरुण केशरी की ग़ज़लों में मानवता और दृढ़ संकल्प जैसे शाश्वत मूल्यों की वकालत है।

वरिष्ठ पत्रकार और ग़ज़लकार डॉ अत्रि भारद्वाज ने कहा कि इनकी ग़ज़लें जनवादी तेवर के साथ लोकतांत्रिक मूल्यों के पक्ष में खड़ी होती है।नवगीतकार सुरेन्द्र वाजपेयी ने संग्रह में शामिल ग़ज़लें आधुनिक जीवन के संघर्षों को खूबसूरती से व्यक्त करती है। प्रो श्रद्धानंद ने कहा कि अरुण केशरी ग़ज़ल की परंपरा को जरूरी मानते हुए भी परिवर्तन, विकास, गतिशीलता और नवीनता के आधुनिक सिद्धांत को आगे बढ़ाते हैं। सोच विचार पत्रिका के संपादक नरेन्द्र नाथ मिश्र ने कहा कि इनकी ग़ज़लें आम आदमी की पहचान के साथ सोच विचार की जमीन भी तैयार करती है। गजलकारों में डॉ नसीमा ‘निशा ‘आशीक बनारसी, सिद्धनाथ शर्मा आदि ने ग़ज़ल प्रस्तुत की।

लेखक अरुण कुमार केशरी ने कहा कि ग़ज़ल साहित्य की एक विधा है जो देश की सांस्कृतिक विरासत को संजोए हुए है। जो दिखता महसूस होता हैं, उसे काग़ज़ पर उतार देता हूं।कार्यक्रम में मुख्य रूप से डॉ माधवी तिवारी, श्रीमती मंजू व्यास, चेतना पांडे, आनंद तिवारी, बाबुल बनारसी, राजेश केसरी, कृष्ण दास केशरी, रामकृष्ण पांडे आदि ने अरुण केशरी को शुभकामनाएं दी। संचालन सेंट्रल फाॅर सनातन रिसर्च के मीडिया प्रभारी विकास बरनवाल एवं धन्यवाद ज्ञापन कार्यक्रम संयोजक रामकृष्ण पांडेय ने किया। इस अवसर पर भारी संख्या में कवि एवं नगर के गणमान्य लोग उपस्थित थे।

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