Varanasi : सड़क से संसद तक होगा महंगी शिक्षा का विरोध, केसरिया भारत, एक बोर्ड, एक फीस,एक पाठ्यक्रम की उठी माँग

Shekhar pandey
वाराणसी, निष्पक्ष काशी । धरोहर संरक्षण सेवा संगठन के आयाम ,केसरिया भारत, के द्वारा महँगी शिक्षा के विरुद्ध छात्र अभिभावक महापंचायत का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता संगठन की राष्ट्रीय सचिव प्रियंवदा मिश्रा ने किया। मुख्य वक्ता संगठन के प्रमुख संयोजक कृष्णा नन्द पाण्डेय ने कहा कि महँगी शिक्षा के कारण एक ही परिवार के दो भाइयो के बच्चे अलग अलग विद्यालय में पढ़ने के लिए मजबूर हैं,आज शिक्षा का उद्देश्य ज्ञान नहीं, बल्कि वर्ग-निर्माण बन गया है.देश में एक ही कक्षा के विद्यार्थी अब अलग-अलग बोर्ड, अलग-अलग पाठ्यक्रम और अलग-अलग फीस ढांचे में पढ़ रहे हैं। कभी शिक्षा समानता का प्रतीक थी, आज असमानता का सबसे बड़ा उदाहरण बन चुकी है। श्रीकृष्ण-सुदामा की वह एकता, जहां मित्रता जाति-धन से परे थी, अब विद्यालयों की दीवारों में बंट गई है ।
एक ही परिवार के दो भाइयों के बच्चे अलग-अलग स्कूलों में पढ़ने की मजबूरी झेल रहे हैं. एक अंतरराष्ट्रीय स्कूल में, दूसरा स्थानीय बोर्ड के सरकारी विद्यालय में. यह विभाजन केवल शिक्षा तक सीमित नहीं रहा; इससे पारिवारिक मतभेद, मनभेद और रिश्तों में दूरी बढ़ी है.यह स्थिति न केवल परिवार में खटास ला रही है, बल्कि समाज में वर्गीय विभाजन को भी गहरा कर रही है.महंगी शिक्षा आज सामाजिक समरसता के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुकी है. शिक्षा का यह बाजारवाद न केवल आर्थिक विषमता बढ़ा रहा है, बल्कि मनुष्य और मनुष्य के बीच का विश्वास भी तोड़ रहा है. जब तक शिक्षा पुनः समानता, नैतिकता और संस्कृति का माध्यम नहीं बनती, तब तक समाज का ताना-बाना बिखरता ही रहेगा और श्रीकृष्ण-सुदामा जैसी मित्रता केवल कहानी बनकर रह जाएगी.वक्ताओं में गौरीश सिंह ने कहा महंगी शिक्षा से बढ़ रहा असंतुलन, गांवों की प्रतिभाएं पलायन को मजबूर हो रही हैं ।
महंगी शिक्षा व्यवस्था और निजी स्कूलों की मनमानी ने समाज में गहरा जनसंख्या असंतुलन पैदा कर दिया है। कार्यक्रम के अतिथि सेंट्रल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मंगलेश दूबे ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के अभाव और सरकारी विद्यालयों की उपेक्षा के कारण गांवों की प्रतिभाएं शहरों की ओर पलायन कर रही हैं। अनेक सरकारी स्कूल या तो बंद हो रहे हैं या नाममात्र के संचालन में हैं, जिससे शिक्षा का विकेंद्रीकरण और गुणवत्ता दोनों प्रभावित हो रहे हैं। शिक्षा का यह व्यापारीकरण न केवल आर्थिक विषमता बढ़ा रहा है, बल्कि सनातन संस्कृति और पारंपरिक मूल्यों पर भी प्रतिकूल असर डाल रहा है। यदि यह प्रवृत्ति नहीं रुकी तो आने वाले समय में सामाजिक और सांस्कृतिक संतुलन गंभीर संकट में पड़ सकता है।
महापंचायत में वाराणसी के साथ जौनपुर,ग़ाज़ीपुर,मिर्जापुर,भदोही व अन्य ज़िलों के लगभग ढाई दर्जन सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए ,सभी ने एक स्वर से महँगी शिक्षा का विरोध किया । कार्यक्रम का संचालन गौरव मिश्र ने किया ।
कार्यक्रम में मुख्य रूप से,उपेन्द्र सिंह,शैलेन्द्र पाण्डेय,हरिनाथ जी,महेंद्र पाण्डेय,चन्द्रदेव पटेल,सारिका दूबे,रोशन दादा,ज्ञानू शर्मा,अभिषेक श्रीवास्तव,नीरज चौबे,राकेश तिवारी,बाबा गोविन्द दास शुभम पाण्डेय,सुनीता सोनी,राजमंगल पाण्डेय सहित सैकड़ो गणमान्य लोग उपस्थित रहे ।



