उत्तर प्रदेशवाराणसी

Varanasi : देव दीपावली 2025 की थीम घोषित: ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के साथ सनातन एकता, नशा मुक्ति और घाटों के संरक्षण पर होगा फोकस

Shekhar Pandey

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वाराणसी। विश्व प्रसिद्ध देव दीपावली आयोजन 2025 को लेकर पराडकर भवन में आयोजित पत्रकार वार्ता मे श्री देव दीपावली एवं आरती महागमिति के अध्यक्ष बाचार्य वागीश दत्त मिश्र, उपाध्यक्ष पं. गंगाधर उपाध्याय, रजनी शर्मा, दीपक यादव (पिन्टु), एवं विक्रम गौड ने बताया कि इस वर्ष की पांच सूत्रीय थीम’ऑपरेशन सिंदूर, जाति-पंथ अनेक, हम सनातनी एक’, घाटों के देवस्थानों का संरक्षण, गौ, गंगा-गीता एवं नशा मुक्त भारत अभियान को समर्पित होगी। इस थीम के अतर्गत घाटो पर सनातन एकता, नशा मुक्ति और राष्ट्रीय एकता के संदेश को सजावट और रंगोलियों के माध्यम में प्रदर्शित किया जाएगा।दशाश्वमेध, राजघाट पर ऑपरेशन सिंदूर की झलक दिखाई देगी। नारी सशक्तिकरण थीम पर विशेष सजावट है।

भगवान बुद्ध पर बुदी परकोटा, जैन घाट अहिंसा परमो धर्मः, जीवो और जीने दो, गुरु नानक देव का प्रका उत्सव थीम के अंतर्गत श्रेष्ठ सजावट के लिए प्रथम, द्वितीय और तृतीय पुरस्कार दिए आएंगे। उन्होंने बताया कि देव दीपावली का आयोजन इस वर्ष शताधिक गंगा घाटों पर किया जा रहा है। लगभग आठ किलोमीटर लंबे क्षेत्र में एक साथ दीप प्रज्वलन और आरती की जाएगी। गंगा, वरुणा, गोमनी के तटों पर भी दीपोत्सव की अ‌द्भुत झिलमिलाहट देखने की मिलेगी। देव दीपावली की प्राचीनता के संदर्भ में पंचगंगा घाट स्थित इंदौर की महारानी अहिल्या बाई होल्कर द्वारा सत्रहवी शताब्दी में निर्मित पत्थरों का हजारा दीप स्तंभ तथा घाट के ऊपर बिंदु माधव मंदिर की जाने वाली मीडीयो पर प्राचीन पत्थरों में निर्मित अन्य दो छोटे दीप स्तंभ स्थापित है।

वर्तमान में हजारा सहित अन्य दीप स्तंभों के जीर्णोद्धार की आवश्यकता है जो समुचित देखरेख, मरम्मत न होने के कारण दिनों दिन जीर्ण होता जा रहा है। जो पंचगंगा और काशी की देव दीपावली की प्राचीनता के प्रत्यक्ष प्रमाण, प्रतीक है। उसका तत्काल संरक्षण होना चाहिए। काशी में भारत देश के राजा रजवाड़ों ने घटो पर मंदिर बनवाया आज मंदिरों का लैण्ड यूज बदल कर होटल बन रहे है काशी मंदिरों का शहर है इसकी पहचान हर कीमत पर देवस्थानों ट्रस्टों के संरक्षण से ही बचेगी। देव दीपावली जहां बुद्ध, महावीर, नानक, रविदास एवं कबीर सबको जोड़कर सभी जातियों के लोग एक साथ मिलकर एक समय में एक नदी के तट पर दीपकों को आपस में जोड देते हैं तब होती है भव्य देव दीपावली। यही मंत्र सिद्ध हुआ है इसके आयोजन को सर्व प्रिय बनाने में। नशा मुक्त भारत अभियान के अन्तर्गत वाराणसी में थी गंगा जी के पवित्र चाही को नशा मुक्त क्षेत्र बनाया जायेगा।

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