Varanasi : भारत भारती परिषद द्वारा श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ ,पर्यावरण सुरक्षा का सन्देश सर्वप्रथम भगवान श्रीकृष्ण ने पर्वतराज गिरिराज पूजन से दिया

Shekhar pandey
वाराणसी। भारत भारती परिषद द्वारा आसभैरव स्थित अग्रवाल भवन में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में षष्ठम दिवस पर अध्यक्षता करते हुए संस्था के अध्यक्ष अशोक वल्लभदास ने कहा कि आज जब सम्पूर्ण विश्व पर्यावरण की समस्या को लेकर विचलित है और इसका समाधान भी नहीं खोज पा रहा है, इस समस्या का एकमात्र उपाय भगवान श्रीकृष्णा ने अपनी अवतार लीला में पर्वतराज गिरिराज पूजन कराकर जन-जन के कल्याण के लिये आज से पांच हजार वर्ष पूर्व ही सन्देश दे दिया था। जबतक पर्वत, वन, गाय, पशु-पक्षी सुरक्षित नहीं रहेंगे तो हम कैसे पर्यावरण की सुरक्षा कर सकेंगे। केवल सरकार के भरोसे ही इस समस्या का समाधान नहीं हो सकता, अपितु जनता – जनार्दन का भी परम कर्तव्य है कि वनों, पर्वतों, पशु पक्षियों एवं साफ-सफाई का ध्यान रखते हुए अपना नागरिक कर्तव्य भी निभाएं।
महोत्सव में श्रीमद्भागवत ब्यासपीठ से बोलते हुए पं. अम्बुज कृष्ण शास्त्री ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने जब गोर्वधन पर्वत को अपनी कनिष्ठा उंगली पर उठाया तभी से उनका नाम गोवर्द्धन धरण जग प्रसिद्ध हो गया। आज भी वही स्वरूप वैष्णव के प्रमुख पीठ नाथ द्वारा (राजस्थान) में श्रीनाथजी के रूप में विद्यमान है और उन्हीं के गोद में विराजमान प्रभु का बाल स्वरूप श्री मुकुन्द रायजी महादेवजी के निवेदन पर काशी के चौखम्भा क्षेत्र में षष्ठपीठ श्री गोपाल मन्दिर में विराजमान होकर वैष्णव जनों को मुक्ति और भक्ति का दान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वेणुनाद्य के द्वारा समस्त गोपियों को शरद पूर्णिका की विशेष रात्रि में रासलीला में आमन्त्रित किया।
प्रणय गीत, गोपीगीत, युगल गीत, भ्रमर गीत की संगीतमय सरस, सुमधुर धुनों से समागार में उपस्थित समस्त वैष्णवजन भक्ति रस से सराबोर हो गये। रुक्मिणी के साथ भगवान श्रीकृष्ण के विवाह के प्रसंग में ऐसी अद्भुत झाकी का दर्शन कर धन्य धन्य हो गये। महोत्सव में श्रीमद्भागवत की पूर्णाहुति पर विस्तृत जानकारी देते हुए संख्या के अध्यक्ष ने काशी की जनता से अनुरोध दोपहर बारह बजे से श्रीमद्भागवत का सारांश भगवान श्रीकृष्ण के 1008 नामों से तुलसी समर्पित कर अपने जीवन को धन्य बनायें।



