वेद, गीता, ब्रह्मसूत्र का सार तत्व श्रीमद्भागवत ही है – गोस्वामी कल्याण रायजी

भक्तियोग सर्वश्रेष्ठ मार्ग भगवान की प्राप्ति का है = चंदनकृष्ण शास्त्री
वाराणसी, 7 अप्रैल । भागवत कथामृत श्रवण से मानव जीवन शोक, काम, क्रोध, लोभ से मुक्त होकर कृतार्थ होता है। यह बातें मंगलवार को श्री शुद्धाद्वैत जप यज्ञ समिति द्वारा चल रहे महाप्रभु श्री वल्लभाचार्य प्राक्टय महोत्सव के द्वितीय दिवस पर श्रीमद् भागवत कथा व्यास पंडित चंदन कृष्ण शास्त्री ने कहा। महाप्रभु श्री वल्लभाचार्य का भूतल पर अवतरण भागवत के गुण अर्थाें को जन-जन के कल्याण के लिए ही हुआ था। काशी में ही उन्होंने मायावद का खंडन किया था। भागवत की कथा के माध्यम से मानव जीवन के समस्त दुखों एवं जीवन की समस्याओं का समाधान होता है।

जीवन आनंद परमानंद से धन्य हो जाता है। चौखंबा स्थित वल्लभगीता श्रीकृष्ण भवन में श्रीमद्भागवत कथा व्यास पीठ से पंडित चंदन कृष्ण शास्त्री ने उपस्थित वैष्णव जनों को संगीतमय प्रस्तुति से भागवत रस के आनंद से परिपूर्ण कर दिया। अध्यक्षीय उद्बोधन में श्री शुद्धाद्वैत जप यज्ञ समिति के अध्यक्ष गोस्वामी कल्याण राय महाराज ने कहा कि वैष्णव जनों का परम कर्तव्य है कि निरंतर जीवन में भगवत नाम स्मरण भगवान की सेवा, कीर्तन, भजन एवं भागवत कथामृत श्रवण मनन निरंतर अभ्यास करें, जिससे उसके जीवन में भगवान की प्राप्ति का सर्वश्रेष्ठ उपाय है।
उन्होंने कहा कि वेद गीता ब्रह्मसूत्र का सार तत्व श्रीमद्भागवत पूराण ही है। इसीलिए भक्तों को बेटीजी ने भागवत कथा का श्रवण करने का उपदेश दिया था और समिति आज भी विगत 75 वर्षों से जगतगुरू वलभाचार्य प्राकट्य महोत्सव पर श्रीमद्भागवत सप्ताह परायण यज्ञ का आयोजन करती चली आ रही है। समिति के जनसंपर्क मंत्री अशोक वल्लभदास ने वैष्णवजनों का स्वागत करते हुए कहा कि यह भागवत कथा प्रातः 8 से 11 बजे तक एवं सायंकाल 4 से 7ः30 बजे तक प्रतिदिन 12 अप्रैल 2026 तक चलती रहेगी। सोमवार 13 अप्रैल को महाप्रभु जी श्री वल्लभ जी की शोभा यात्रा जतनबर से सायं 4 बजे प्रस्थान करेगी, जिसमें अधिक से अधिक वैष्णव जन सम्मिलित होकर अपने जीवन को धन्य करें।








