एआई और ड्रोन तकनीक से बदली फिल्म निर्माण की दिशा, बीएचयू कार्यशाला में छात्रों को मिला व्यावहारिक प्रशिक्षण

Shekhar Pandey
वाराणसी, 07 अप्रैल। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के कला संकाय स्थित प्रेमचंद सभागार में आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला “ड्रोन और एआई का उपयोग: डिजिटल फिल्म निर्माण” के दूसरे दिन विशेषज्ञों ने आधुनिक तकनीकों पर आधारित व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। कार्यक्रम का मुख्य फोकस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ड्रोन के फिल्म निर्माण में बढ़ते उपयोग पर रहा।
विशेषज्ञ डॉ. मुदिता राज ने जेनरेटिव और एजेंटिक एआई की विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि एआई से प्राप्त परिणाम ‘प्रॉम्प्ट’ की गुणवत्ता पर निर्भर करते हैं। उन्होंने जेमिनी और डीपसीक जैसे प्लेटफॉर्म का उल्लेख करते हुए डेटा-आधारित स्टोरीटेलिंग के भविष्य पर प्रकाश डाला।
ड्रोन विशेषज्ञ अंकित कुमार मलयन ने कैमरा तकनीक पर प्रशिक्षण देते हुए एपर्चर, आईएसओ और व्हाइट बैलेंस जैसी मूलभूत सेटिंग्स को समझाया। उन्होंने कहा कि वीडियो शूटिंग और एडिटिंग में समान फ्रेम रेट का उपयोग जरूरी है, अन्यथा वीडियो की गुणवत्ता प्रभावित होती है। साथ ही, उन्होंने ड्रोन संचालन से जुड़े डिजीसीए के नियमों की जानकारी भी दी।
डॉ. नवीन गौतम ने फिल्म निर्माण में निरंतर अभ्यास के महत्व को रेखांकित करते हुए छात्रों को समूहों में विभाजित कर प्रायोगिक प्रशिक्षण कराया। इस दौरान छात्रों ने दो लघु फिल्में ‘डस्टबिन’ और ‘बटुआ’ तैयार कीं, जिनका प्रदर्शन समापन सत्र में किया गया।
समापन समारोह में मुख्य अतिथि प्रो. सजल मुखर्जी ने कहा कि डिजिटल फिल्म निर्माण के क्षेत्र में रोजगार के व्यापक अवसर उपलब्ध हैं, लेकिन इसके लिए युवाओं को तकनीकी रूप से दक्ष होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि एआई और ड्रोन के बढ़ते उपयोग ने इस क्षेत्र का स्वरूप बदल दिया है।
कार्यशाला संयोजक डॉ. बाला लखेन्द्र ने कार्यक्रम की संक्षिप्त रिपोर्ट प्रस्तुत की। सह-संयोजक डॉ. धीरेंद्र कुमार राय ने अतिथियों का स्वागत किया, जबकि आयोजन सचिव डॉ. शैलेंद्र कुमार सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
कार्यशाला में पत्रकारिता, अंग्रेजी, इतिहास, मंच कला और दृश्य कला संकाय के बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। प्रतिभागियों ने इसे ज्ञानवर्धक बताते हुए कहा कि इस प्रशिक्षण से उनकी तकनीकी समझ और रचनात्मक दृष्टिकोण दोनों का विस्तार हुआ है।








