उत्तर प्रदेशवाराणसी

सोनार समाज अब नहीं रहेगा उपेक्षित, लखनऊ महासमागम में एकजुटता का आह्वान

Shekhar Pandey

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वाराणसी। सोनार/स्वर्णकार समाज अब किसी राजनीतिक दल की कठपुतली तथा बंधुवा बनकर नहीं रहेगा। लखनऊ में आगामी 11 अप्रैल को आयोजित सोनार महासमागम में शामिल होने के लिए स्वजातीय बंधुओं की बुधवार को स्वर्णकार भारती सेवा संस्थान की एक बैठक मैदागिन स्थित उन्नति रेजीडेंसी में संपन्न हुई। बैठक मे संस्थान के राष्ट्रीय संयोजक रवि सर्राफ ने कहा कि स्वर्णकार समाज राष्ट्रवादी विचारधारा से ओत-प्रोत है। देश व प्रदेश में हमारे समाज की संख्या बल होने के बावजूद सोनार समाज को उनके हिस्से की राजनैतिक दल भागीदारी नहीं देते हैं। इसका सबसे बड़ा कारण सोनार समाज का बंटा हुआ होना है। हमें अपने हक की लड़ाई स्वयं लड़नी होगी। इसके लिए हम सभी को आपसी राग द्वेष को भूलकर एक सूत्र में बंधकर कार्य करना पड़ेगा। पूर्वांचल अध्यक्ष ईश्वर दयाल सिंह सेठ ने कहा कि जिस तरह से अन्य समाज को राजनैतिक पार्टियां भागीदारी देती हैं, उसी तरह से सोनार समाज को भी मिलना चाहिए। महिला प्रदेश अध्यक्ष सरिता सर्राफ ने कहा कि हमारा समाज शिक्षा, राजनीति, व्यवसाय आदि के क्षेत्र में किसी से कम नहीं है। हमारा सोनार समाज समय-समय पर दूसरों की मदद कर उन्हें संभालने का काम करता है और हमारे ही समाज को राजनीतिक दल हाशिए पर रख, पिछलग्गू बनाए रखती हैं। जिलाध्यक्ष व पूर्व पार्षद किशोर सेठ ने कहा कि आगामी 11 अप्रैल को होने वाले सोनार महासमागम में स्वर्ण कला बोर्ड के गठन, आईपीसी की धारा 411/412 परिवर्तित बीएनएस 317 में पुलिसिया उत्पीड़न, साहूकारी लाइसेंस की बहाली, स्वर्ण व्यवसाईयों को सशक्त न्याय दिलवाने तथा स्वर्ण व्यवसाईयों को शस्त्र लाइसेंस उपलब्ध कराने का मुख्य मुद्दा होगा। जिलाध्यक्ष बेबी सेठ ने कहा कि सोनार समाज में व्यापार को लेकर प्रतिद्वंद्विता रखें, लेकिन अपने हक की लड़ाई के लिए एकता बनाएं तभी देश ही राजनीतिक पार्टियों स्वर्णकार समाज के महत्व को जानेंगी। महिला नगर अध्यक्ष सुनीति सिंह ने कहा कि सोनार समाज का सभी दलों ने शोषण किया है लेकिन अब सोनार समाज जागरूक हो चुका है, जिसके परिणाम स्वरूप स्वर्णकार समाज के विभिन्न संगठनों के संयुक्त आह्वान पर सोनार महापंचायत का आयोजन किया गया है। संचालन कमल कुमार सिंह, धन्यवाद प्रकाश महासचिव अरुण सोनी ने किया। बैठक मे मुख्य रूप से दयाशंकर सेठ, कमलेश चंद्र वर्मा, ईश्वर चंद्र वर्मा, रौनी वर्मा, कृष्ण कुमार सेठ, श्याम सुंदर सिंह, विष्णु दयाल सेठ, विनोद सेठ, शुभम सेठ गोलू, पंकज सर्राफ, दीपक सेठ दीपू, किशन सेठ, संजय सेठ बाबा, राजेश सेठ, अनिल सेठ, मनोज स्वर्णकार, राजन सेठ आदि मौजूद रहे।

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