Varanasi : सारनाथ के प्रथम उत्खनन का श्रेय बाबू जगत सिंह को, एएसआई ने दी आधिकारिक मान्यता

Shekhar Pandey
वाराणसी। प्रमाणिक दस्तावेजों एवं प्राथमिक ऐतिहासिक साक्ष्य के विस्तृत अध्ययन के बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण नई दिल्ली ने स्वीकार किया है कि वाराणसी में सारनाथ स्थल बाबू जगत सिंह के द्वारा कराए गए उत्खनन से सर्वप्रथम प्रकाश में आया है। उल्लेखनीय है कि बाबू जगत सिंह ने 18वीं सदी के उत्तरार्ध में सारनाथ क्षेत्र में उत्खनन संबंधी कार्य को आरंभ कराया था। लंबे समय तक इतिहास के पन्नों में यह तथ्य दबा रहा। विगत वर्षों में जगत सिंह रॉयल फैमिली प्रोजेक्ट शोध समिति के अथक परिश्रम और प्रामाणिक स्रोतों के आधार पर अब इसे आधिकारिक मान्यता मिल गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय भारतीय इतिहास लेखन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।बाबू जगत सिंह शोध समिति के संरक्षक प्रदीप नारायण सिंह के अनुसार यह कार्य भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से संपन्न हुआ है। बाबू जगत सिंह रॉयल फैमिली शोध समिति ने उन प्रमाणित दस्तावेजों को,भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, नई दिल्ली के समक्ष रखा है, जिसके आधार पर औपनिवेशिक शासन के समय से चली आ रही गलत मान्यता अब समाप्त हुई है।
इस निर्णय से वाराणसी सहित पूरे देश में प्रसन्नता की लहर है। बाबू जगत सिंह की छठवीं पीढ़ी के वंशज प्रदीप नारायण सिंह ने कहा कि यह हमारे पूर्वजों के आशीर्वाद आप सभी के सहयोग व समर्थन का ही परिणाम है कि आज उनके ऐतिहासिक योगदान को देश ने स्वीकारा है। यह केवल हमारे जगतगंज राजपरिवार एवं जगत सिंह रॉयल फैमिली प्रोजेक्ट (जेएसआरएफपी) के संरक्षक परिवार व समिति के लिए ही नहीं अपितु वाराणसी के साथ ही देश की ऐतिहासिक विरासत के लिए भी गर्व का विषय है। हमारा शोध निरंतर जारी है, आगे शीघ्र ही कुछ नए तथ्य प्रकाश में आएंगे, देश को उससे अवगत कराया जाएगा।पत्रकार वार्ता के दौरान शोध समिति के सदस्य, अधिवक्ता त्रिपुरारी शंकर, प्रो राणा पीवी सिंह, अरविंद कुमार सिंह एडवो, अशोक आनंद, डॉ (मेजर) अरविंद कुमार सिंह, राजेंद्र कुमार दुबे वरिष्ठ पत्रकार, मनीष खात्री अवनीधर, एहसन अहमद, विकास एवं शमीम उपस्थित रहे।



