काशी हिंदू विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय आयुर्वेद विद्यापीठ का 29वां दीक्षांत समारोह संपन्न

Shekhar Pandey
वाराणसी। आयुष मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन स्वायत्तशासी संस्थान राष्ट्रीय आयुर्वेद विद्यापीठ का 29वां दीक्षांत एवं शिष्योपनयनीय संस्कार समारोह बुधवार को बनारस हिंदू विश्वविद्यालय स्थित स्वतंत्रता भवन में आयोजित किया गया। समारोह में सीआरएवी (राष्ट्रीय आयुर्वेद विद्यापीठ प्रमाणपत्र) कार्यक्रम के अंतर्गत प्रशिक्षित विद्वानों को सम्मानित किया गया तथा आयुर्वेद की प्राचीन गुरु–शिष्य परंपरा को रेखांकित किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि केन्द्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए कहा कि काशी, जो अष्टांग आयुर्वेद में शल्य चिकित्सा की उद्गमस्थली मानी जाती है, उस पावन भूमि से आयुर्वेद के ज्ञान का प्रसार देश-दुनिया तक हुआ है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद केवल चिकित्सा पद्धति नहीं बल्कि संपूर्ण जीवनशैली और समग्र स्वास्थ्य का विज्ञान है।

उन्होंने गुरु–शिष्य परंपरा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इसी परंपरा ने प्राचीन काल से आयुर्वेदिक ज्ञान को सुरक्षित रखते हुए उसे आगे बढ़ाने का कार्य किया है। धन्वंतरि, चरक, सुश्रुत और वाग्भट जैसे महान आयुर्वेदाचार्य इसी परंपरा से प्रेरित होकर आयुर्वेद को समृद्ध बनाने में सफल हुए।
जाधव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आयुष क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिल रही है। आयुष मंत्रालय आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध, सोवा-रिग्पा और होम्योपैथी जैसी पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों में शिक्षा, अनुसंधान और प्रशिक्षण को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है।
विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल शैक्षणिक उपलब्धि का अवसर नहीं बल्कि समाज सेवा की नई जिम्मेदारी का भी प्रतीक है। उन्होंने युवाओं से पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान के समन्वय के साथ आयुर्वेद को प्रमाण आधारित चिकित्सा प्रणाली के रूप में स्थापित करने का आह्वान किया।
आयुष मंत्रालय के सचिव पद्मश्री वैद्य राजेश कोटेचा ने विद्यार्थियों को बधाई देते हुए अनुसंधान और शोधपत्र लेखन पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि प्रमाण आधारित अनुसंधान आयुष प्रणालियों की वैश्विक स्वीकार्यता को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी ने विद्यार्थियों को आयुष प्रणाली के विकास में सक्रिय योगदान देने के लिए प्रेरित किया। वहीं राष्ट्रीय आयुर्वेद विद्यापीठ के शासी निकाय के अध्यक्ष पद्मभूषण वैद्य देवेन्द्र त्रिगुणा ने कहा कि संस्थान का उद्देश्य उत्कृष्ट आयुष चिकित्सकों का निर्माण करना है और इस दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है।
समारोह की शुरुआत में राष्ट्रीय आयुर्वेद विद्यापीठ की निदेशक डॉ. वंदना सिरोहा ने अतिथियों का स्वागत करते हुए संस्था की गतिविधियों और गुरु–शिष्य परंपरा के संरक्षण में उसकी भूमिका पर प्रकाश डाला।
इस अवसर पर डॉ. मनीषा उपेंद्र कोठेकर (अध्यक्ष, राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा पद्धति आयोग), प्रो. एस.एन. सांखवार (निदेशक, आयुर्विज्ञान संस्थान, बीएचयू), प्रो. अमित पात्रा (निदेशक, आईआईटी-बीएचयू) और प्रो. पी.के. गोस्वामी (डीन, आयुर्वेद संकाय, बीएचयू) सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
समारोह में आयुर्वेद के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए वैद्य निर्मला शर्मा, केवल कृष्ण ठाकराल और गिरधारी लाल मिश्रा को आजीवन उपलब्धि सम्मान से सम्मानित किया गया। इसके अलावा कई प्रतिष्ठित वैद्यों और विद्वानों को भी सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के माध्यम से आयुर्वेद की परंपरा, अनुसंधान और वैश्विक संभावनाओं को आगे बढ़ाने के संकल्प को दोहराया गया।



