Varanasi : महामृत्युंजय से डेढ़सी पुल तक निकली अलौकिक शिव बारात, काशी हुई शिवमय

Shekhar Pandey
वाराणसी। महाशिवरात्रि के अवसर पर महा मृत्युंजय मंदिर से डेढ़सी पुल तक निकली शिव बारात ने काशी को एक बार फिर आस्था, उल्लास और लोक परंपरा के अद्भुत रंग मे रंग दिया। ‘जस दूल्हा तस बनी बराता’ की भावभूमि पर सजी इस बारात में अ-शिव वेशधारी शिव वर, औधड़, बाबा के गण, भूत-पिशाच, दैत्य-राक्षस, बंदर-आलू, सपेरे और मदारी शामिल होकर कण-कण में शंकर होने का एहसास करा रहे थे। बाबा और औघड़ों की इस अनूठी बारात जैसे ही महा मृत्यंजय मंदिर से आगे बढ़ी, सड़क के दोनों ओर ठसाठस भीड इहलोक-परलोक की झांकी शिव बारात मे देख वातावरण हर-हर महादेव के जयघोष से गूंज उठा।

44 वर्ष पूर्व काशी विश्वनाथ मंदिर के अरघा में लगे सोने की चोरी और उसके पुनः प्राप्त होने के बाद शिव बारात के रूप में जो उत्सव शुरू हुआ, वह देखते ही देखते शहर का सबसे बड़ा लोक उत्सव बन गया और अब यह लाखों श्रद्धालुओं का मेला बन चुका है। इस वर्ष की बारात मे बाराती और घराती सभी होली के रंग में सराबोर नजर आए। ऐसा लगा मानो फाल्गुन की होली समय से पहले ही उतर आई हो। विभिन्न प्रांतों की झांकियां और रंगों से सजी टोलियां आकर्षण का केंद्र रहीं। बारात में दूल्हे के रूप में प्रसिद्ध नेत्र चिकित्सक डॉ अनुराग टंडन, सहबाला के रूप में डॉ रमेश दत्त पांडेय और दुल्हन के रूप में व्यापारी नेता बदरुद्दीन अहमद की सहभागिता ने काशी की गंगा-जमुनी तहजीब का जीवंत दृश्य प्रस्तुत किया। खांटी बनारसी अंदाज के लिए प्रसिद्ध अभिनेता संजय मिश्रा की उपस्थिति ने बारात की रौनक और बढ़ा दी।

अघौडी, भूत-पिशाच, देवी-देवता, किन्नर, सपेरे, मदारी, जादूगर और विभिन्न झांकियों से सजी यह बारात मानो लोक और अलौकिक के संगम का दृश्य बन गई थी। आयोजकों ने बाबा की बारात को आकर्षक बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। बरसाने की लट्ठमार होली की झांकी विशेष आकर्षण का केंद्र रही। महा मृत्युंजय से डेढ़सी पुल तक निकली यह शिव बारात एक बार फिर सिद्ध कर गई कि काशी में उत्सव केवल मनाए नहीं जाते, बल्कि जीए जाते हैं। यहां हर आस्था लोक परंपरा में ढलकर जन-जन का उत्सव बन जाती है।

महाशिवरात्रि की इस अनुपम छटा ने एक बार फिर काशी को शिवमय कर दिया। पहली बार मंहत निवास से प्रतीकात्मक प्रतिमा, दंड और छतरी के साथ नगाड़े की गडगडाहट के साथ महामृत्युंजय के महंत परिवार ने बाबा की आरती किया, महिलाओं ने अपने बाबा का परछन कर बाबा को इलायची मेवा का सेहरा पहना कर मां गौरा को विवाह कर लाने के लिए विदा किया पूरा माहौल वैवाहिक लोक गीत से गूंज रहा था। आर के बौधरी, दीपक बजाज, रमेश दूबे, संदीप केशरी, पवन खन्ना, महेश माहेश्वरी, कमल सिंह, अशोक चौरसिया, राजू वर्मा, विवेक मेहरोत्रा आकाश शाह, गोरख यादव बारात के सुचारु संचालन में लगे रहे। संयोजक/महामंत्री दिलीप सिंह ने बारातियों को साधुवाद दिया।



