बीएचयू की बड़ी उपलब्धि: रोग प्रतिरोधी उच्च उत्पादक धान की नई किस्म उद्योग को लाइसेंस

Shekhar Pandey
वाराणसी, 14 मार्च। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय ने अपने शोध आधारित नवाचारों को किसानों तक पहुँचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। विश्वविद्यालय द्वारा विकसित नई धान किस्म मालवीय मनीला सिंचित धान-1 (एमएमएसडी-1) का लाइसेंस उद्योग साझेदार को प्रदान किया गया है, जिससे इसका बड़े पैमाने पर उत्पादन कर देश-विदेश के किसानों तक पहुँचाया जा सकेगा।
इस किस्म को लगभग 18 वर्षों के सतत अनुसंधान के बाद विकसित किया गया है। यह कार्य अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान, मनीला (फिलीपींस) के सहयोग से किया गया। उच्च उत्पादकता और रोग प्रतिरोधक क्षमता वाली इस धान किस्म का लाइसेंस त्रिमूर्ति प्लांट साइंसेज़ प्रा. लि., हैदराबाद को दिया गया है।

शनिवार को बीएचयू परिसर में कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी की उपस्थिति में विश्वविद्यालय और उद्योग साझेदार के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। विश्वविद्यालय की ओर से कुलसचिव प्रो. अरुण कुमार सिंह तथा कंपनी की ओर से उप महाप्रबंधक अमित कुमार शुक्ला ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते के तहत विश्वविद्यालय तकनीक और ब्रीडर बीज उपलब्ध कराएगा, जबकि कंपनी इसके बड़े पैमाने पर उत्पादन और वितरण की जिम्मेदारी निभाएगी।
कुलपति प्रो. चतुर्वेदी ने इसे कृषि नवाचारों को किसानों तक पहुँचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताते हुए वैज्ञानिकों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास देश की कृषि उत्पादन प्रणाली में सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं। उन्होंने अन्य प्रमुख फसलों में भी नवाचार को बढ़ावा देने पर बल दिया।
कृषि विज्ञान संस्थान के आनुवंशिकी एवं पादप प्रजनन विभागाध्यक्ष प्रो. श्रवण कुमार सिंह के नेतृत्व में विकसित इस किस्म की विशेषता यह है कि यह 115-120 दिनों में पककर तैयार हो जाती है और 55 से 64 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन दे सकती है। यह किस्म उत्तर प्रदेश, बिहार और ओडिशा की जलवायु के लिए उपयुक्त है तथा अपेक्षाकृत कम पानी में भी अच्छी पैदावार देती है। इसके दाने लंबे और पतले होते हैं, जिससे बाजार में बेहतर मूल्य मिलता है।
इस किस्म में लीफ ब्लास्ट, ब्राउन स्पॉट और फॉल्स स्मट जैसे रोगों के प्रति मध्यम प्रतिरोधक क्षमता भी पाई जाती है। शीघ्र परिपक्व होने के कारण यह गहन फसल प्रणाली के लिए भी उपयुक्त मानी जा रही है, जिससे किसानों को अगली फसल समय पर बोने में सुविधा होगी।
मुख्य प्रजनक प्रो. श्रवण कुमार सिंह ने बताया कि भारत सरकार ने वर्ष 2025 में इस किस्म को उत्तर प्रदेश, बिहार और ओडिशा जैसे प्रमुख धान उत्पादक राज्यों के लिए अधिसूचित कर दिया है। उन्होंने कहा कि यह किस्म किसानों की आय बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगी।
इस अवसर पर कृषि विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रो. यू.पी. सिंह, विधि प्रकोष्ठ के समन्वयक प्रो. रजनीश कुमार सिंह, आईपीआरटीटी सेल के समन्वयक प्रो. बिरिंची सर्मा, प्रो. गीता राय, डॉ. आकांक्षा सिंह तथा त्रिमूर्ति प्लांट साइंसेज़ के प्रतिनिधि अमन श्रीवास्तव सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।



