उत्तर प्रदेशवाराणसी

Varanasi : धर्म की रक्षा के लिए अपने शरीर तक न्योक्षावर करना पड़े तो संकोच नहीं करना चाहिए : पंडित दिवाकर शास्त्री

Shekhar pandey

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वाराणसी, निष्पक्ष काशी । चौक थाना क्षेत्र के राजादरवाजा स्थित अति प्राचीन रामजानकी मंदिर में चल रहे भागवत कथा के चौथे दिन मंगलवार को कथा व्यास ज्ञानमूर्ति पंडित दिवाकर शास्त्री ने श्रद्धालुओं को दधीचि ऋषि का रोचक प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि देवता वृत्रासुर दैत्य के अत्याचार से परेशान थे। तब देवताओं ने वृत्रासुर दैतय के वध की योजना बनाई पर वे इसमें सफल नहीं हो पा रहे थे। नृत्रासुर के वधन के लिए बज्र का निर्माण जरूरी था। यह बज्र दधीजि के हड्डियों से ही निर्मित किया जा सकता था। तब देवतागण दधीचि ऋषि के पास गये और उनहें सारी बातों से अवगत कराते हुए उनसे अपनी हड्डियों के दान करने के लिए याचना की। याचना को स्वीकार करते हुए दधीचि ने अपनी हड्डियों का दान कर दिया।

इस कथा से यही शिक्षा मिलती है कि धर्म की रक्षा के लिए अपने शरीर तक न्योक्षावर करना पड़े तो संकोच नहीं करना चाहिए। हमें सदैव धर्म के पथ पर चलने और पालन करने का निरन्तर प्रयासरत रहना चाहिए। व्यक्ति को चाहिए कि कभी भी किसी लोभ और मोह में पड़ कर अपने धर्म का परित्याग नहीं करना चाहिए। पंडित दिवाकर शास्त्री ने कहा कि जो मनुष्य अपने धर्म का अनुसरण नहीं करता उसका जीवन दुखमय बना रहता है। कथा वाचन के साथ ही कृष्ण जन्मोत्सव बड़े धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर मुख्य रूप से विजय रसतोगी, मुन्नालाल कसेरा, आचार्य रविकर गौतम, प्रदीप, त्रिवेणी पाण्डेय, नेहा केसरी, किरण पाण्डेय, ऋषिका केसरी, प्रीति मिश्र, अरुणा मिश्र, सुषमा अनुपमा गुप्ता आदि उपस्थित रही।

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