उत्तर प्रदेशवाराणसी

Varanasi : मनरेगा को कमजोर करने का आरोप, मोदी सरकार पर विपक्ष का तीखा हमला

Shekhar Pandey

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वाराणसी। मोदी सरकार ने “सुधार” के नाम पर लोकसभा में एक और बिल पास करके दुनिया की सबसे बड़ी रोज़गार गारंटी स्कीम मनरेगा को खत्म कर दिया है। यह महात्मा गांधी की सोच को खत्म करने और सबसे गरीब भारतीयों से काम का अधिकार छीनने की जान-बूझकर की गई कोशिश है। मनरेगा गांधी के ग्राम स्वराज, काम की गरिमा और डिसेंट्रलाइज़्ड डेवलपमेंट के सपने का जीता-जागता उदाहरण है, लेकिन इस सरकार ने न सिर्फ़ उनका नाम हटा दिया है, बल्कि 12 करोड़ एनआरइजीए मज़दूरों के अधिकारों को भी बेरहमी से कुचला है। दो दशकों से करोड़ों ग्रामीण परिवारों के लिए लाइफ़लाइन रहा है और कोविड-19 महामारी के दौरान आर्थिक सुरक्षा के तौर पर ज़रूरी साबित हुआ है। 2014 से, मोदी मनरेगा के बहुत ख़िलाफ़ रहे हैं। उन्होंने इसे “कांग्रेस की नाकामी की जीती-जागती निशानी” कहा था।

पिछले 11 सालों में, मोदी सरकार ने एमएनआरइजीएस को सिस्टमैटिक तरीके से कमज़ोर किया है, कमज़ोर किया है और उसमें तोड़फोड़ की है, बजट में कटौती करने से लेकर राज्यों से कानूनी तौर पर ज़रूरी फंड रोकने, जॉब कार्ड हटाने और आधार-बेस्ड पेमेंट की मजबूरी के ज़रिए लगभग सात करोड़ मज़दूरों को बाहर करने तक। इस जानबूझकर किए गए दबाव के नतीजे में, पिछले पाँच सालों में मनरेगा हर साल मुश्किल से 50-55 दिन काम देने तक सिमट गया है। यह सोचा-समझा खत्म करना सत्ता के नशे में चूर एक तानाशाही सरकार की सोची-समझी बदले की कार्रवाई के अलावा और कुछ नहीं है। यह कदम महात्मा गांधी के आदर्शों का सीधा अपमान है और ग्रामीण रोज़गार पर खुली जंग का ऐलान है। रिकॉर्ड बेरोज़गारी से भारत के युवाओं को तबाह करने के बाद, मोदी सरकार अब गरीब ग्रामीण परिवारों की बची हुई आखिरी आर्थिक सुरक्षा को निशाना बना रही है।

हम सड़क से लेकर संसद तक, हर मंच पर इस जन-विरोधी, मज़दूर-विरोधी और फ़ेडरल-विरोधी हमले का विरोध करेंगे। पत्रकार वार्ता में राष्ट्रीय प्रवक्ता उदितराज के राघवेन्द्र चौबे, अनिल श्रीवास्तव, प्रदेश प्रवक्ता सजीव सिंह, अमरनाथ पासवान, फसाहत हुसैन, डॉ राजेश गुप्ता, सतनाम सिंह, राजीव राम, अरुण सोनी आदि लोग उपस्थित रहे।

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