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संसद में भारत की संतुलित और सिद्धांत आधारित विदेश नीति को रखा: कीर्तिवर्धन सिंह

Nispaksh kashi

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नई दिल्ली। विदेश मंत्रालय में राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने संसद में पूछे गए अतारांकित प्रश्नों के उत्तर में भारत की संतुलित, परिपक्व और दूरदर्शी विदेश नीति का प्रभावी प्रस्तुतीकरण किया। उन्होंने कहा कि भारत की कूटनीति वैश्विक प्रतिबद्धताओं, क्षेत्रीय स्थिरता और पड़ोसी देशों के साथ सहयोग की नीति पर आधारित है।

इज़राइल-फिलिस्तीन मुद्दे पर सरकार का पक्ष स्पष्ट करते हुए उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की 25-26 फरवरी 2026 को हुई इज़राइल यात्रा के दौरान भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद समर्थित गाजा शांति योजना के प्रति अपना समर्थन दोहराया। उन्होंने कहा कि फिलिस्तीन के प्रति भारत का रुख ऐतिहासिक रूप से सुसंगत और सिद्धांत आधारित रहा है तथा भारत क्षेत्र में न्यायपूर्ण, व्यापक और स्थायी शांति के लिए प्रतिबद्ध है। इसी क्रम में भारत ने संयुक्त राष्ट्र में जारी संयुक्त वक्तव्य से भी स्वयं को जोड़ा।

उन्होंने यह भी बताया कि 19 फरवरी 2026 को वाशिंगटन डी.सी. में आयोजित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की बैठक में भारत ने पर्यवेक्षक के रूप में भाग लेकर वैश्विक शांति प्रयासों में अपनी सक्रिय भूमिका निभाई।

बांग्लादेश के साथ संबंधों पर एक अन्य प्रश्न के उत्तर में राज्य मंत्री ने कहा कि भारत की ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति के तहत बांग्लादेश के साथ रिश्ते जन-केंद्रित और विकासोन्मुख हैं। वर्ष 2014 से अब तक भारत ने बांग्लादेश को 6.5 अरब अमेरिकी डॉलर की दो प्रमुख ऋण सहायता (लाइन ऑफ क्रेडिट) प्रदान की है। इसके अलावा अनुदान, सामुदायिक विकास परियोजनाओं, मानवीय सहायता, आपदा राहत और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों के माध्यम से भी सहयोग दिया गया है।

उन्होंने कहा कि भारत और बांग्लादेश के बीच गहरे ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामाजिक संबंध हैं और भारत एक लोकतांत्रिक, स्थिर, शांतिपूर्ण तथा समावेशी बांग्लादेश के प्रति अपनी प्रतिबद्धता बनाए हुए है। बंदरगाह नीति से जुड़े प्रश्न पर उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत ने अपने निर्यातों के ऊपर बांग्लादेश को कोई विशेष प्राथमिकता नहीं दी थी और भविष्य में किसी भी नीति परिवर्तन से पहले सभी पहलुओं पर विचार किया जाएगा।

राज्य मंत्री के उत्तरों से यह स्पष्ट हुआ कि भारत वैश्विक मंच पर संतुलन, संवाद और सहयोग की नीति के साथ आगे बढ़ रहा है तथा राष्ट्रीय हितों की रक्षा करते हुए वैश्विक शांति और स्थिरता में भी सक्रिय भूमिका निभा रहा है।

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