रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में “हिंदू राष्ट्र बनाने में हम सब का योगदान और भावी भूमिका” विषय पर भव्य सनातन सम्मेलन आयोजित

Shekhar Pandey
वाराणसी। विश्वविख्यात धार्मिक नगरी काशी में “हिंदू राष्ट्र बनाने में हम सब का योगदान और भावी भूमिका” विषयक भव्य सनातन सम्मेलन का आयोजन सिगरा स्थित रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर के सभागार में रविवार को किया गया। सम्मेलन का शुभारंभ मुख्य अतिथि विश्वप्रसिद्ध आध्यात्मिक चिंतक एवं वैश्विक दृष्टा राजर्षि डॉ भूपेंद्र कुमार मोदी जी के कर-कमलों द्वारा दीप प्रज्वलन से हुआ। इस अवसर पर सनातन संस्कृति एवं सनातन परंपराओं पर विद्वानों ने अपने विचार व्यक्त किया।यह आयोजन आध्यात्मिकता, संस्कृति और राष्ट्रीय दृष्टिकोण का एक सुंदर समन्वय प्रस्तुत करता है, जिसका केंद्रीय विषय था भारत को विश्वगुरु बनाना”।


इस भव्य कार्यक्रम में देश-विदेश से आए आध्यात्मिक साधकों, सांस्कृतिक प्रेमियों, गणमान्य अतिथियों एवं श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। विभिन्न धार्मिक मठों के प्रतिनिधि, शोधकर्ता एवं अन्य विशिष्ट जन भी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। अपने प्रेरणादायक उद्बोधन में राजर्षि भूपेंद्र जी ने जीवन के महत्वपूर्ण आध्यात्मिक सिद्धांतों पर प्रकाश डाला, जिनमें शामिल हैं: 1. सूर्य को ईश्वर का एकमात्र प्रत्यक्ष स्वरूप मानना 2. पुनर्जन्म की अवधारणा 3. कर्म का महत्व 4. धर्म की प्रासंगिकता
5. मोक्ष (मुक्ति) की ओर मार्ग। कार्यक्रम संयोजक पंडित प्रकाश मिश्र ने बताया कि सम्मेलन में सनातन धर्म के विषय में लोगों द्वारा पूछे गए अनेक प्रश्नों का मुख्य अतिथि ने उत्तर देकर समाधान किया। कार्यक्रम का संचालन चक्रवर्ती विजय नावड एवं मोहिका सिंह ने किया। कार्यक्रम में काशी के प्रख्यात चित्रकार स्वर्गीय बैजनाथ वर्मा जी के सुपुत्र सिंधु वर्मा ने भगवान शिव का चित्र राजर्षि जी को भेंट किया।

सम्मेलन में मुख्य रूप से रीवा के महाराज पुष्पराज सिंह जूदेव,जगद्गुरु बालक देवाचार्य जी महाराज ,वीएस सुब्रमण्यम मणि जी, स्वामी मुक्तानंद पुरी जी महाराज, प्रोफेसर पतंजलि मिश्र, विश्व हिंदू फेडरेशन के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ अजय सिंह ,भारतीय जनता पार्टी के एम एल सी हंसराज विश्वकर्मा, भाजपा के महानगर अध्यक्ष प्रदीप अग्रहरि ,सनातन रिसर्च संस्थान के अभिषेक द्विवेदी ,मनीष त्रिपाठी,कमलापति कश्यप,आनंद साहू ,प्रदीप नांबियार,पंकज भट्ट सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित थे । यह सम्मेलन आध्यात्मिक ज्ञान और राष्ट्रीय चेतना का एक सशक्त संगम सिद्ध हुआ, जिसने विश्व के लिए भारत को एक मार्गदर्शक प्रकाश के रूप में स्थापित करने की भावना को और सुदृढ़ किया।



