Varanàsi : गोपाष्टमी पर शुरू हुआ गो प्रतिष्ठा आंदोलन का दूसरा चरण: गाय को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाने का संकल्प

वाराणसी। गोपाष्टमी के अवसर पर जगद्गुरु शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद जी महाराज के नेतृत्व में गो प्रतिष्ठा आंदोलन का दूसरा चरण आरंभ हो गया है। इस आंदोलन का उद्देश्य भारत में गाय को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाना और गाय की सुरक्षा के लिए संविधान में सुधार लाना है। इसके तहत गोध्वज स्थापना की जाएगी, जो देश के हर जिले और विधानसभा स्तर तक विस्तारित होगी।
गाय के प्रति सनातन धर्म की श्रद्धा को सम्मान देने और गोहत्या पर रोक लगाने के लिए यह आंदोलन लगातार जारी है। जगद्गुरु शंकराचार्य जी ने 22 सितंबर से 27 अक्टूबर तक 36 राज्यों की राजधानियों में गो धर्मसभा आयोजित कर गो ध्वज स्थापना की। इस यात्रा की समाप्ति वृंदावन धाम में हुई।
गोपाष्टमी के पावन दिवस पर वाराणसी के श्री विद्या मठ में आयोजित गो गोष्ठी में गो प्रतिष्ठा आंदोलन के अगले चरण की रूपरेखा तय की गई। शंकराचार्य जी ने इस संवत्सर को “गौ संवत्सर” घोषित किया, जिसके तहत प्रत्येक जिले में गो ध्वज की स्थापना का संकल्प लिया गया। इस आंदोलन को आगे बढ़ाते हुए माघ मेले में प्रयागराज में एक महीने तक चलने वाला 324 कुंडीय यज्ञ भी आयोजित किया जाएगा।
इस अवसर पर सभी सांसदों से उनकी गोभक्ति के प्रति निष्ठा जताने की अपील करते हुए आगामी गर्मी सत्र से पहले संसद के सामने धरना प्रदर्शन का भी आह्वान किया गया है। गो गोष्ठी में यह भी निर्णय लिया गया कि 27 मार्च 2025 को वाराणसी में “गो महाकुंभ” का आयोजन किया जाएगा, जिसमें देशभर से 1.25 करोड़ गोभक्त शामिल होंगे। इस कार्यक्रम के दौरान गो भक्तों को गोहत्या रोकने की शपथ दिलाई जाएगी और आंदोलन को और व्यापक बनाने की रणनीति पर विचार किया जाएगा।
इस आयोजन में 36 राज्यों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और गो प्रतिष्ठा आंदोलन को समर्थन देने का संकल्प लिया।



