ग्रामीण विकास में रंगमंच की भूमिका पर संगोष्ठी आयोजित

Nispaksh kashi
वाराणसी, 26 मार्च। विश्व रंगमंच दिवस (27 मार्च) की पूर्व संध्या पर काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के सामाजिक विज्ञान संकाय स्थित समन्वित ग्रामीण विकास केन्द्र में “ग्रामीण विकास में रंगमंच की भूमिका” विषय पर एक संयुक्त संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम समन्वित ग्रामीण विकास केन्द्र एवं अनुकृति रंगमण्डल, वाराणसी के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ।
कार्यक्रम का शुभारम्भ महामना पंडित मदन मोहन मालवीय की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इसके पश्चात अतिथियों का स्वागत शॉल एवं स्मृति-चिन्ह भेंट कर किया गया।

संगोष्ठी की अध्यक्षता सामाजिक विज्ञान संकाय के अधिष्ठाता ने की। मुख्य अतिथि के रूप में प्रो. आनन्द वर्धन शर्मा, निदेशक, एम.एम.टी.टी.सी. उपस्थित रहे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि रंगमंच ग्रामीण विकास में जन-जागरूकता और सामाजिक परिवर्तन का प्रभावी माध्यम है।
मुख्य वक्ता के रूप में वरिष्ठ रंगकर्मी अनूप अरोड़ा एवं राजेश्वर त्रिपाठी ने रंगमंच की सामाजिक उपयोगिता और ग्रामीण क्षेत्रों में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला।
इस अवसर पर वरिष्ठ रंगकर्मी डॉ. जयन्त रैना, अध्यक्ष, अनुकृति वाराणसी सहित अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि रंगमंच के माध्यम से ग्रामीण समाज में शिक्षा, जागरूकता और सहभागिता को बढ़ावा दिया जा सकता है।
कार्यक्रम में संकाय के अध्यापकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया तथा विषय पर सार्थक चर्चा की।
कार्यक्रम का संयोजन डॉ. आलोक कुमार पाण्डेय, समन्वयक, समन्वित ग्रामीण विकास केन्द्र द्वारा किया गया। अंत में डॉ. भूपेन्द्र प्रताप सिंह, परियोजना अधिकारी ने अतिथियों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया, जबकि संचालन एवं समापन शिवम पाण्डेय, सचिव, अनुकृति वाराणसी ने किया।






