Varanasi : रंगभरी एकादशी पर बाबा विश्वनाथ की पालकी यात्रा, अबीर-गुलाल से सराबोर हुई काशी
Shekhar Pandey
वाराणसी। काशी में रंगभरी एकादशी का उल्लास पारंपरिक श्रद्धा और राजसी वैभव के साथ मनाया गया। टेढ़ीनीम स्थित महंत आवास पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। गौरी-शंकर और उनके पुत्र श्रीगणेश को गुलाल अर्पित कर होली उत्सव का विधिवत शुभारंभ किया गया।
महंत परिवार के प्रतिनिधि पं. वाचस्पति तिवारी ने बाबा को धारण कराने से पूर्व राजशाही पगड़ी, माता पार्वती के महारानी मुकुट और प्राचीन पालकी का विशेष पूजन-अर्चन किया। दिनभर श्रद्धालु बाबा विश्वनाथ और मां महामाया को अबीर अर्पित करते रहे। चल प्रतिमाओं के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में काशीवासी एवं विशिष्टजन पहुंचे।

शाम लगभग पांच बजे अर्चकों का दल जब महंत आवास की गली में पहुंचा तो पूरा क्षेत्र ‘हर-हर महादेव’ के उद्घोष से गूंज उठा। कपूर आरती के उपरांत संकेत मिलते ही बाबा की पालकी को महंत परिवार के सदस्यों ने कंधों पर उठाया। डमरुओं की गूंज, शंखनाद और गुलाल की वर्षा के बीच बाबा विश्वनाथ माता गौरा और गोद में विराजमान गणेश के साथ राजसी ठाट में निकले। महंत आवास से मंदिर के मुख्य द्वार तक पालकी पर विशेष गुलाल और गुलाब की पंखुड़ियों की वर्षा होती रही।
यात्रा टेढ़ीनीम से साक्षी विनायक और ढुंढिराज विनायक होते हुए काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंची। मार्ग में नौ ग्रहेश्वर महादेव मंदिर के पास तथा विष्णु कसेरा के आवास से 51 किलो गुलाब की पंखुड़ियों की वर्षा कर श्रद्धालुओं ने स्वागत किया। साक्षी विनायक तक पहुंचते-पहुंचते श्रद्धालुओं के वस्त्र अबीर और गुलाल से रंग चुके थे।
शिवांजलि में भजनों की रसधार
इससे पूर्व महंत आवास पर पारंपरिक शिवांजलि का आयोजन हुआ। रुद्रनाद बैंड के गायक अमित त्रिवेदी ने ‘पार्वती संग सदा शिव खेल रहे होली…’ की प्रस्तुति से माहौल को भक्तिमय बना दिया। राग नट भैरव में निबद्ध भजनों ने उपस्थित जनसमूह को आध्यात्मिक भाव से भर दिया। पूर्वांचल के चर्चित भजन गायक पुनीत जेटली ‘पागल बाबा’, प्रभु सिंह दाढ़ी, अदिति शर्मा, सौरभ शुक्ला, सरोज वर्मा और संजय दुबे ने भी भजनों की प्रस्तुति देकर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
पूरे आयोजन के दौरान काशी की प्राचीन परंपरा, श्रद्धा और उत्सव का अद्भुत संगम देखने को मिला।



