Varanasi : सन 2032 से आरंभ होगा सतयुग, पश्चिम से उदय होगा सूर्य: डॉ. काशीनाथ मिश्र

Shekhar pandey
वाराणसी। पंचायती बाग, नाटी इमली स्थित सुधर्मा महा महा संघ काशी वाराणसी मंडल के तत्वाधान में चल रहे सात दिवसीयश्री मद्भागवत महा पुराण और भविष्य मालिका के विश्व प्रसिद्ध कथाकार, विचारक और शोधकर्ता डॉ पंडित काशी नाथ मिश्र ने कथा के पांचवे दिवस प्रवचन में बताया कि आज से 600 वर्षों पूर्व पांच शाखाओं द्वारा ताड़ पत्रों पर यह ग्रन्थ प्राचीन ओडिया लिपि में लिखा गया था जिसका उद्देश्य युग संध्या के काल खंड में होने वाले संकेत और संहार लीला के बारे में भक्तों को सचेत करना और उनके अंदर उस ब्रह्म कर्म (त्रिसंध्या, नित्य भागवत पाठ, माधव नाम भजन, निरामिष, नशामुक्त जीवन शैली) के बारे में जानकारी प्रदान करना था, जिसके पालन से उनकी न केवल खंड प्रलय से रक्षा सुनिश्चित होगी बल्कि वो नव सतयुग में भी प्रवेश कर पायेंगे।
विगत 12 वर्षों से भविष्य मालिका में लिखी मानव कल्याण की बाते सुगम और सरल भाषा में जन जन तक पहुंचाने का अथक प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज जो प्राकृतिक आपदाएं, युद्ध की विभीषिकाएं, कोरोना महामारी एवं राजनैतिक परिवर्तन इत्यादि हो रहा हैं, इसको मैने 12 वर्ष पूर्व बता दिया था। पंडित जी ने बताया कि सन 2032 के उपरांत सत्य युग के आरंभ में सुधर्मा सभा में सभी भक्त नवीन कलेवर धारण कर “राम हरे कृष्ण हरे” महामंत्र और माधव नाम का गायन करेंगे जिसमें कल्कि भगवान और 33 कोटि देवी देवता भी उपस्थित होंगे।
सूर्य पश्चिम से उदय होगा, समुद्र का जल मीठा हो जाएगा, ना कोई रोग होगा ना ही कोई शोक होगा। पृथ्वी शास्य शामला, धन धान्य से परिपूर्ण हो जाएगी। समस्त भक्त जन स्वर्ग तुल्यता का अनुभव करेंगे। सांसारिक, माया बंधनों से छूट जाना ही मुक्ति है, जो निष्काम कर्म से ही संभव है, फिर 84 लक्ष योनियों में जन्म मरण के चक्रों से सदा के लिए मुक्ति मिल जाती है। तभी मानव का परित्राण हो वैकुंठ कि प्राप्ति होती है, वहां चतुर्भुज दिव्य शरीर, प्रभु का संग लाभ, निरोगिता, शोक और भय और मृत्य रहित जीवन की प्राप्ति होती है।