Varanasi : राजेन्द्र यादव की 96वीं जयंती पर गोष्ठी व काव्य संगोष्ठी, साहित्यकारों ने दी श्रद्धांजलि

Shekhar pandey
वाराणसी। मुंशी प्रेम चंद परम्परा के संवाहक कथा शिल्पी राजेन्द्र यादव की 96वीं जयंती पर “सत्तामुखी-साहित्य और साहित्यकार” विषयक गोष्ठी एवं काव्य संगोष्ठी का आयोजन सरदार पटेल स्मृति भवन तेलियाबाग में सम्पन्न हुआ। पूर्वाचल भर से जुटे साहित्य प्रेमियों ने राजेन्ड यादव के तैल चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें अपनी भावभीनी श्रद्धाजाले दी। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार (पूर्व जिला जज) चन्द्र भाल सुकुमार ने अपने उद्बोधन में कहाँ कि मानव हितैषी, समाज सुधारक क्रान्तिकारी कभी चुप नहीं बैठता, राजेन्द्र यादव अपनी कलम से सदैव समाज के सुविधा वंचित, उपेक्षित लोगों की आवाज उगते रहे। वह हिन्दी साहित्य में इक्कीसवीं सदी के सन्नाटे को आवाज थे।
विशिष्ठ अतिथि डॉ शिवपति सिंह ने कहाँ राजेन्द्र यादव, साहित्य कुलीनतावाद, रूढ़िवादी परम्पराओं को सशक्त चुनौति पेश की जिसके लिए इनको कोर्ट कचहरी भी देखने पड़े लेकिन वह चट्टान की तरह अडिग रहे। वे लोकतांत्रिक मूल्यों की स्थापना जीवन पर्यंत करते रहे।अध्यक्षीय उद्बोधन में श्याम सुन्दर सिंह कश्यप ने कहा कि राजेन्द्र जी को अपनी बात कहने की अद्भूत् क्षमता रही, साहित्य में उनके दो अमुल्य अवदान स्त्री विमर्श एवं दलित विमर्श को कभी भी भुलाया नहीं जा जा सकता, वह विद्रोही तेवर के निर्भिक साहित्यकार थे। कार्यक्रम में कवि वृजेश पाण्डेय, सिद्धनाथ शर्मा, चितिंत बनारसी, बुद्धिनाथ तिवारी, शंकर आनन्द, वीपिन कुमार आदि ने काव्य पाठ किया।
अतिथियों का स्वागत प्रो विजय प्रताप सिंह संयोजन संचालन डॉ जयशंकर जय, धन्यवाद ज्ञापन डॉ उमाशंकर यादव ने किया। कार्यक्रम को प्रो दयाशंकर, डॉ दुर्गाप्रसाद, डॉ रविन्द्र यादव, कैलाश शोसलिस्ट, सुमित पांडे, जगदीश कुशवाहा आदि ने किया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से योगेन्द जेटली, चौ0 शोभनाथ, बनवारीयादव, प्रमोद सिंह, डॉ बनवारी सिंह यादव, मदन यादव, किशन, अरविंद यादव, कन्हैया, रामानंद दीक्षित आदि लोग उपस्थित थे