उत्तर प्रदेशवाराणसी

Varanasi : इंटरनेशनल वेदांत सोसाइटी में गुरुपूर्णिमा उत्सव, ब्रह्मचर्य दीक्षा और छात्रवृत्ति योजना का शुभारंभ

Shekhar pandey

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वाराणसी। इंटरनेशनल वेदांत सोसाइटी, दशाश्वमेध स्थित आश्रम में गुरुपूर्णिमा उत्सव श्रद्धाभाव से प्रारंभ हुआ। रथयात्रा के निकट कन्हैया लाल गुप्ता मोतीवाला स्मृतिभवन में विशेष आध्यात्मिक संध्या अनुष्ठान का आयोजन हुआ। मुख्य रूप से गुरुपूजन तथा आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम भक्तिभाव से संपन्न हुआ, जिसमें वाराणसी के विशिष्ट गणमान्य व्यक्ति और यूरोप के श्रद्धालु उपस्थित रहे। इस अवसर पर वाराणसी के मठाधीश स्वामी प्रबुद्धानंद पुरी, महासचिव आईवीएस, अपने गुरु श्री भगवान की स्मरण में एक छात्रवृत्ति कार्यक्रम ‘भगवान प्रेमामृत’ का उद्घाटन किया। इस छात्रवृत्ति में जरूरतमंद गरीबी से ग्रस्त और प्रतिष्ठित शैक्षणिक छात्रों के शिक्षा में विशेष योगदान के लिए भगवान प्रेमामृत छात्रवृत्ति कार्यक्रम शुरू किया गया। बंगालीटोला इंटर कॉलेज स्कूल और दुर्गा चरण गर्ल्स इंटर कॉलेज स्कूल के कक्षा VI से XII के शीर्ष उपलब्धि हासिल करने वाले प्रत्येक छात्र को 5000/- रुपये की राशि छात्रवृत्ति के रूप में दी गई।

साथ ही, इस छात्रवृत्ति योजना के तहत आधुनिक शिक्षा की दिशा में प्रयास को आगे बढ़ाने के लिए बी. सी. गुप्ता स्कूल फॉर डेफ एंड डंब को एक कंप्यूटर सेट भी दिया गया। 8-जुलाई को स्वामी प्रबुद्धानंद पुरी द्वारा आश्रम के सेवक बप्पादित्य पाल को ब्रह्मचर्य संन्यास दीक्षा दिया गया, उनका नाम ब्रह्मचारी वासुदेव चैतन्य दिया गया। साथ ही एम्स्टर्डम की मिस मेरेन और लंदन की ललिता देवी प्रतीकात्मक रूप से ब्रह्मचर्या के ब्रत लिए। 8-9 जुलाई को वैदिक यज्ञ उपनयन संस्कार के साथ ब्रह्मचर्य संन्यास दीक्षा हुआ। यह ई भी एस तथा पूरे विश्व के लिए एक महत्वपूर्ण तथा यादगार क्षण है। वासुदेव चैतन्य पिछले 10 वर्षों से आईवीएस से जुड़े हुए हैं और पिछले 3-4 वर्षों से वाराणसी आश्रम में रह रहे हैं। आश्रम जीवन से पहले उन्होंने आईआईटी गुवाहाटी से फिजिक्स में मास्टर्स, पीएचडी की है और इससे आगे 3-4 वर्ष रशिया, स्वीडन अन्य यूरोपीय देशों के यूनिवर्सिटी में रिसर्च और अध्ययन हैं। इस दौरान ई भी एस और भगवान से जुड़े रहे। गुरु के सानिध्य में जब जीवन का बोध और सत्य प्राप्त हुआ तब सब दुनियादारी छोड़के ईश्वरमय जीवन के अपनालिया और संन्यास मार्ग को चुके श्री भगवान के चरण में हमेशा के लिए आश्रय ले लिया। वेदांत सोसाइटी अपने संस्थापक श्री भगवान द्वारा लंबे समय से संजोए गए स्वप्न की परिणति है कि अपने स्वयं के वास्तविक स्वरूप का ज्ञान मनुष्य को उसके सीमित अहंकार के बंधनों से मुक्त करके शाश्वत शांति की खोज करने में मदद करती है।

सोसाइटी का गठन 19 नवंबर 1989 को हुआ था। इसका उद्देश्य लोगों को अद्वैत वेदांत के सार और विश्व शांति को पुनः स्थापित करने में इसकी भूमिका से अवगत कराना था। इस अवसर पर स्वामी प्रबुद्धानंद पुरी, महासचिव अंतर्राष्ट्रीय वेदांत सोसायटी, ब्रह्मचारी वासुदेव चैतन्य, एम्स्टर्डम आईवीएस आश्रम से ब्रह्मचारिणी प्रभा मां ने विशिष्ट अतिथियों को संबोधित किया और अद्वैत वेदांत, श्रीमद्भागवत गीता और सनातन धर्म के दर्शन पर प्रकाश डाला। एक सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन रहा जहां वाराणसी के श्री देवव्रत, और लंदन की ललिता देवी ने भक्ति गीत गाए और श्री कृष्ण मिश्रा ने संगीत बजाया। 11 नारी शक्तियों के एक समूह द्वारा शंख बजाकर गणमान्य व्यक्तियों और अतिथियों का स्वागत किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत गुरु वंदना, वैदिक स्तोत्र और निर्वाण शतकम के गहन पाठ से हुई तथा इसका समापन महामंत्र के साथ हुआ।

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