Varanasi : राजभाषा सम्मान समारोह-2025 में भव्य काव्य गोष्ठी का आयोजन

Shekhar pandey
वाराणसी। चंद्रा साहित्य परिषद (ट्रस्ट) द्वारा “राज भाषा सम्मान समारोह-2025 ” के अवसर पर इंदिरा नगर चितईपुर स्थित कार्यालय पर भव्य काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। काव्य गोष्ठी मे पूर्वांचल के विभिन्न जिलों, जौनपुर, सोनभद्र, चन्दौली, मिर्जापुर आदि से लब्ध प्रतिष्ठित साहित्यकारों ने हिंदी के उत्थान, जन मानस में स्थान और मातृ भाषा बनाने के लिए हिंदी क्षेत्र से जन जागरण अभियान पर अपनी शानदार रचनाओं से काव्य गोष्ठी को नया रंग रूप देंने का भरपूर प्रयास किया गयाI संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष कवि इंजी0 राम नरेश “नरेश” ने आगंतुक कवियों का मल्यार्पण, अंग वस्त्रम, प्रसस्ति पत्र और उपहार देकर अभिनंदन किया।डॉ करुणा सिंह द्वारा सरस्वती वंदना के पश्चात संस्था के संरक्षक डॉ महेंद्र नाथ तिवारी अलंकार, राष्ट्रीय अध्यक्ष इंजी0 राम नरेश “नरेश”, आईएजे के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ कैलाश सिंह विकास, सांस्कृतिक महासचिव नाथ सोनंचली, दीपक दबंग, गिरीश पांडेय, भुलक्कड, अशोक प्रियदर्शी, डॉ मनमीत सहित अन्य कवियों ने संस्था की संस्थापक स्मृति शेष चंद्रावती नरेश और माँ सरस्वती के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित किया।मुख्य अतिथि एवं प्रमुख वक्ता दिनेश चंद्र ने अपने वक्तव्य में हिंदी के विकास, आज की परिस्थिति में हिंदी की दशा एवं दिशा पर विस्तार से बतायाI उन्होंने यह भी कहा कि दैनिक जीवन मे विचारों और भावों की अभिव्यक्ति वाली भाषा ही जनभाषा होती है।
हिंदी जनभाषा होने के साथ -साथ सम्पर्क की भी भाषा है। भारत मे हिंदी एक ऐसी सशक्त भाषा है जिसमे देश को एकता में पिरोनी की ताकत है और हिंदी राष्ट्रीय चेतना की प्रतीक है। काव्य गोष्ठी मे डॉ छोटेलाल सिंह ‘मनमीत’ की “अब हौसलों में जान जगाने की शौक रख, तकदीर के सहारे ही रहना नहीं अच्छा”, नाथ सोनांचली “इसी बिना प सुखनवर कहा ज़माने मे, अदब के साथ कही बात जो इशारों में”, दीपक दबंग “माँ भारती की शान है हिन्दी, भारत की पहचान है हिन्दी” भुलक्कड़ बनारसी “शर्म हया अब रहा नहीं झूम रहा झक्कास”, अलंकार का मुक्तक “सबकी भाषा का यहाँ सम्मान होना चाहिए ,पर ज़ुबान ए हिन्द पर अभिमान होना चाहिए” गिरीश पांडेय “विदेशों में भारत की पहचान हिन्दी, हमारे वतन के लिए शान हिन्दीI” माधुरी मिश्रा “सच्चाई को लिखते जाओ। बन जाओ तुम एक अख़बार” आनन्द कृष्ण मासूम “सोंधी मिट्टी की ख़ुशबू अब आती नहीं, ईंट पत्थर ने मारा मेरे गाँव को” नवल किशोर गुप्ता “हिन्दी ही पहचान है, हिन्दी हिन्दुस्तान ह” कवयत्री साधना साही “मेरी प्यारी हिंदी तू तो, भारत माता के मस्तक की बिंदी” के साथ ही अन्य कवियो हरिबंश सिंह बवाल, अशोक प्रियदर्शी, मधुलिका राय, अखलाक भारतीय, आलोक बेताब, अतुल श्रीवास्तव, सिद्ध नाथ शर्मा सिद्ध, संतोष प्रीत और अन्य दूसरे कवियों की रचनाओं से काव्य गोष्ठी की नई ऊंचाई मिली। इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार डॉ कैलाश सिंह विकास, आनंद कुमार सिंह अन्ना, देवेंद्र श्रीवास्तव,पत्रकार योगेंद्र कुमार की उपस्थिति रही।



