नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा

Shekhar pandey
वाराणसी। शारदीय नवरात्र के दूसरे दिन मां दुर्गा के ब्रह्मचारिणी स्वरूप की पूजा-अर्चना की गई। मान्यता है कि मां ब्रह्मचारिणी के पूजन से भक्तों को तप, संयम और साधना का वरदान मिलता है।
पौराणिक कथा के अनुसार, मां ब्रह्मचारिणी ने राजा हिमालय के घर जन्म लिया था। नारद मुनि की प्रेरणा से उन्होंने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तप किया। इस दौरान उन्होंने हजार वर्षों तक केवल फल-फूल और सौ वर्षों तक शाकाहार पर जीवन व्यतीत किया। कठोर तपस्या के कारण उन्हें ब्रह्मचारिणी या तपश्चारिणी कहा जाता है।
श्रद्धालु मानते हैं कि मां ब्रह्मचारिणी को गुड़हल और कमल के पुष्प अर्पित करने से विशेष फल मिलता है। वहीं, भोग में चीनी, मिश्री और पंचामृत चढ़ाने की परंपरा है।
मंदिर स्थल– देवी ब्रह्मचारिणी का प्राचीन मंदिर काल भैरव मंदिर के पीछे, सब्जी मंडी से दाहिनी गली में स्थित है।
ज्येष्ठा गौरी के दर्शन
वासंतिक नवरात्रि दर्शन क्रम में दूसरा स्थान ज्येष्ठा गौरी का है। मान्यता है कि इनके दर्शन-पूजन से सभी प्रकार की कामनाएं पूरी होती हैं और धर्म के प्रति श्रद्धा बढ़ती है। देवी ज्येष्ठा गौरी का मंदिर कर्णघंटा क्षेत्र के सप्तसागर मोहल्ले में स्थित है।



