उत्तर प्रदेशवाराणसी

Varanasi : कसाईखानों को सब्सिडी पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का सवाल, सरकार की नीतियों पर उठाए गंभीर प्रश्न

Shekhar Pandey

Advertisements

वाराणसी। ‘कसाई-तंत्र’ को 5 करोड़ का सरकारी (सब्सिडी) तिलक हैरानी का विषय है कि जहाँ किसान त्रस्त है, वहीं शासन प्रदेश के कई विशाल कसाईखानों को 35% पूँजीगत अनुदान और 5-5 करोड़ रुपये तक की नकद सहायता दे रहा है। जिस करदाता के पैसे से गौ-रक्षा होनी थी, उसी पैसे से वधशालाओं में संहार की मशीनें लगवाई जा रही हैं। उक्त बातें पत्रकारवार्ता के दौरान शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने कही।

उन्होंने कहा कि क्या विडंबना है जिस किसान के बेटे को खाद और बीज के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते हैं, उसी किसान के टैक्स के पैसे से उन्नाव और अलीगढ़ की वधशालाओं में 35% की सब्सिडी पर ‘पशु-वध मशीनें’ लगाई जा रही हैं। हम आपके माध्यम से योगी से पूछना चाहेंगे कि क्या यह ‘करुणा’ ( टैक्स) के पैसे से ‘क्रूरता’ का पोषण नहीं है? क्या यह चुनावी चंदा बनाम गौ-भक्ति है? इलेक्टोरल बॉन्ड के आँकड़े गवाह हैं कि अल्लाना ग्रुप जैसे मांस निर्यातकों ने सत्तापक्ष को करोडों रुपये का चंदा दिया है। क्या इस तथाकथित ‘दान/ दक्षिणा’ में ही इन ‘रक्त-बीजों’ के लाइसेंस आज भी सुरक्षित हैं? जब रक्षक ही भक्षक से चंदा लेने लगे, तो मर्यादा का लोप निश्चित है। प्रश्न है कि क्या गौ-वंश का रक्त इन चुनावी चन्दों के नीचे दब गया है?

महाराज ने कहाकि हमने पशुपालन मंत्री के वक्तव्य को परखने के लिये वैज्ञानिक जांच कराने सम्बन्धी एक पांच सूत्रीय पत्र भी योगी को भेजा है जिसका उत्तर अभी तक अप्राप्त है। इधर उप्र की क्रूरता दिख रही है उधर ईश्वर कृपा से इन सबसे उपज रही घोर निराशा के बीच एक सच्चे/असली हिन्दू के समाचार भी मिले हैं। जिसमें गुजरात के एक बीजेपी विधायक की इच्छाशक्ति दिखी है। जहां शासन ‘परेशानी’ और ‘कानूनी अड़चनों’ का बहाना बनाता है वहीं 6 फरवरी 2026 को गुजरात के अहमदाबाद में विधायक अमित शाह ने सिद्ध कर दिया कि जहाँ चाह है, वहाँ राह है। उनके द्वारा पार्टी की विचारधारा को आधार बनाकर विरोध करने पर अहमदाबाद नगर निगम को 32 करोड़ रुपये का बूचड़खाना बजट वापस लेना पड़ा है।यदि गुजरात का एक साधारण विधायक यह साहस दिखा सकता है, तो उत्तर प्रदेश के ‘पीठाधीश्वर’ ‘संत’ ‘योगी’ ‘महंत’ मुख्यमंत्री में इन वधशालाओं के लाइसेंस निरस्त करने की शक्ति क्यों नहीं है?” उलटे इनकी छाया में धर्म का पाखंड बढ रहा है। ‘स्टैण्डर्ड फ्रोजन फूड्स’ (उन्नाव) जैसी इकाइयों के मालिक कमल कांत वर्मा जैसे हिन्दू नाम वाले लोग हैं। ऐसे में यह युद्ध अब केवल मजहब का नहीं, बल्कि ‘पवित्रता बनाम पूँजी’ का हो चुका है, जहाँ शासन धन के लोभ में अधर्म को संरक्षण दे रहा है। इन परिस्थितियों में बीते दस दिन में योगी बाबा की हिन्दू हृदय सम्राट् की बनावटी छवि निरन्तर धूमिल हो रही है। आशा है कि आने वाले तीस दिनों में वे अपने आपको संभालेंगे और गोमाता को राज्यमाता घोषित करते हुये यह मांस विक्रय का क्रूर कारोबार बन्द करेंगे।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button