Varanasi : हेरिटेज पैलेस में श्रीमद्भागवत कथा के सप्तम दिवस पर कृष्ण-सुदामा की मित्रता का वर्णन

Shekhar pandey
वाराणसी। श्रीमदभागवत कथा के सातवेँ दिन चौका घाट स्थित हेरिटेज पैलेस में श्रोताओं नें कृष्ण सुदामा के बीच मित्रता एवं प्रेम की कथा का श्रवण किया। प्रसिद्ध कथा वाचक श्रीकांत शर्मा नें संगीतमय कथा का वर्णन करते हुए बताया कि भगवान श्री कृष्ण की 8 पटरानियाँ हैं जो पूरे भ्रह्मण्ड को चला रहीं हैं। हमारा शरीर पांच तत्वों से मिलकर कर बना है।इस माटी के शरीर पर अंहकार नहीं करना चाहिए। हमारा शरीर ठाकुर जी की कृपा से ही चलायमान है। पूजा पाठ में 16100 वेद मंत्र हैं वेदों में प्राण हैं। वेदों का पिता परमात्मा हैं। यदि मांगना हो तो काशी पुराधीपति काशी विश्वनाथ की डेवढ़ी पर माथा टेक कर मांगना। जब तक पूर्ण समर्पण नहीं होगा तो आप भगवान से नहीं मिल सकते हैं। गीता में लिखा है परमात्मा अपने भक्तों की रक्षा स्वयं करते हैं।
आप भजन और साधना से मृत्यु को मार सकते है। आओ कन्हैया, आओ मुरारी, तेरे दर पे आया सुदामा भिखारी॥ श्री कांत शर्मा नें द्वारिका में कृष्ण सुदामा की लगन, महाभारत, राजसूय यज्ञ एवं गीता के प्रसंग का भी वर्णन किया। उन्होंने बताया कि सुदामा के पास भ्रह्म तेज था। सुदामा के स्वांस में हमेशा श्री कृष्ण नाम जपना था। भक्तों नें कृष्ण सुदामा के वेश में प्रेम और मित्रता का सुंदर मंचन किया। जगत नश्वर है और जगदीश शाश्वत सत्य हैं,
भगवान के रूप का नाम है राधा और स्वरुप का नाम कृष्ण राधा, कृष्ण का प्रेम ही सनातन सत्य है। जिस घर में राधा कृष्ण जैसा प्रेम हो वहां लक्ष्मी ही लक्ष्मी हैं। संसार में प्रेम को दर्शाने के लिये भगवान नें दो स्वरुप लिये। इस धरती का सौंदर्य है प्रेम। जीवन में तेजस्वी बनो। कृष्ण को वश में सिर्फ सत्संग ही कर सकता है। ईश्वर को पाने के लिये गीता श्री मदभागवत रामायण को गुरु बनाओ।
श्री काशी अग्रवाल समाज के सभापति संतोष कुमार अग्रवाल ‘हरे कृष्ण ज्वेलर्स’, रंजना अग्रवाल नें श्री कृष्ण के चरणों में नत मस्तक होकर व्यासपीठ श्री कांत शर्मा से आशीर्वाद लिया। काशी के रैदास श्री कृष्ण की भक्ति में लीन होकर कृष्ण कृष्ण कह के रोने लगेयह देख मीराबाई नें उन्हें अपना गुरु बना लिया। मीरा को मिले गुरु रैदासा..। उनके भजन प्रभु जी तुम दीपक हम पानी पर श्रोता झूम उठें। कर्तव्य निष्ठ संत और कथा सुनने वाले भक्त भारत को ऊंचाई पर ले जाते हैं। मंदिर और समाज का धन खाने वाले का वंशनाश हो जाता है। ॐ कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने प्रणतः क्लेशनाशाय गोविंदाय नमो नमः एक शक्तिशाली मंत्र है जो भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित है, जिसमें उन्हें वासुदेव पुत्र, परमात्मा और गोविंद के रूप में संबोधित करते हुए सभी प्रकार के कष्टों के नाश के लिए नमन किया जाता है। कार्यक्रम के अंत में कथा के पश्चात हवन पूजन एवं आरती के पश्चात महाप्रसाद का वितरण किया गया।
कार्यक्रम में स्वागत मुख्य यजमान नवल किशोर कथूरिया, योगेश अग्रवाल ‘पासा वाले’, यतीन्द्र कथूरिया संचालन कृष्ण कुमार काबरा एवं संयोजन अंशुमान गुप्ता, सौरभ कपूर, वेणु रंजन अग्रवाल, अरविन्द सिकारिया, रुपेश महेश्वरी नें किया। इस अवसर पर पूर्व विधायक अजय राय श्री काशी अग्रवाल समाज के सभापति संतोष अग्रवाल, विश्वनाथ मंदिर के लेखाधिकारी राम नारायण, उत्तम कुमार अग्रवाल, अमित अग्रवाल, प्रद्युम्न अग्रवाल, अनिल अग्रवाल, आमोद अग्रवाल, विनय अग्रवाल, बृजकमल दास अग्रवाल, प्रदीप अग्रवाल, रंजना अग्रवाल, अमिता अग्रवाल, स्नेहा अग्रवाल, कल्पना अग्रवाल, राजकुमारी अग्रवाल सहित सैकड़ो श्रोता एवं भक्त गण उपस्थित रहें।



