घनघोर बारिश में भी आस्था का सैलाब: नाटी इमली भरत मिलाप में उमड़े श्रद्धालु

Shekhar pandey
वाराणसी। देश की धार्मिक नगरी काशी अपनी परंपराओं, आस्थाओं और अलौकिक उत्सवों के लिए विश्व प्रसिद्ध रहा है। इन्हीं में एक लक्खा मेला के नाम से मशहूर नाटी इमली का भरत मिलाप है। भरत और राम के मिलन का दृश्य को देखने के लिए श्रद्धालुओं का जनसमूह उमड़ता है। आज घनघोर बारिश के बावजूद आस्थावानों का जनसमूह उमड़ा। राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न का ऐतिहासिक मिलन हुआ और लीला स्थल जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा। शुक्रवार को शाम जब भगवान का रथ मैदान में प्रवेश किया तो श्रद्धा और उत्साह की लहर वातावरण में फैल गयी। इस बार का मिलन विशेष इसलिए रहा क्योंकि सुबह से ही लगातार बारिश हो रही थी, परंतु भीषण बारिश ने भी काशी की श्रद्वावान जनता की आस्था को डिगा नही सका। हजारों की संख्या में श्रद्धालु छाता लिए बरसात में भी भीगते हुए चारों भाईयों मिलन को देखकर अविभूत हो गए। भरत-शत्रुघ्न ने राम-लक्ष्मण के साष्टांग दंडवत कर स्वागत किया और राम एवं लक्ष्मण रथ से उतरे और दौड़कर दोनों भाइयों को उठाकर अपने गले से लगा लिया।
बारिश के बीच चारों भाइयों के इस मिलन से अद्भुत वातावरण इस बार देखने को मिला। काशी के महाराजा आनंत विभूति नारायण सिंह ने भी इस अवसर पर अपनी शाही परंपरा को निभाते हुए भगवान श्रीराम को गिन्नी अर्पित कर आशीर्वाद लिया। मान्यता है कि इस लीला की परंपरा लगभग 480 वर्ष पूर्व पूर्व मेघा भगत ने शुरू की थी जो आज विश्व प्रसिद्ध है। परंपरागत भगवान के रथ को उठाने के लिए यादव बंधु आंखों में सुरमा, पारंपरिक धोती-बनियान और सिर पर पगड़ी धारण किए हुए जब रामलला का कई टन वजनी रथ खींचते हुए जय सिया राम के उद्घोष किया तो पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। लीला स्थल पर प्रशासन की ओर से इस बार सुरक्षा व्यवस्था भी बेहद सख्त किया गया था, लीला क्षेत्र में वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित था तथा ड्रोन से क्षेत्र की निगरानी की जा रही थी। सुरक्षा के साथ श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए विशेष इंतजाम किए थे।



