उत्तर प्रदेशवाराणसी

Varanasi : व्यापारियों ने कहा जीएसटी की दरे कम हो जाने से आम नागरिकों को बहुत राहत मिली है

Shekhar pandey

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वाराणसी, निष्पक्ष काशी । सोमवार 6अक्टूबर को होटल हरि विलास ,सिद्ध गिरी बाग में फेडरेशन ऑफ़ आल इंडिया व्यापार मंडल की एक बैठक आयोजित की गई जिसमे मोदी सरकार द्वारा जीएसटी 2.0 में किए गए बदलावों का स्वागत करते हुए देश के यशस्वी एवं लोकप्रिय प्रधानमंत्री को बधाई दी गई | व्यापारियों ने कहा कि आज जब पूरा विश्व आर्थिक संकट से जूझ रहा है, तब प्रधानमंत्री की प्रेरणा से भारत विश्व में उभरकर अपने उद्योग एवं व्यापार के योगदान से चौथी अर्थव्यवस्था पर पहुँच गया है, जो हम सब देशवासियों के लिए बहुत गौरव की बात है। जीएसटी की दरों में बदलाव से स्वास्थ्य, बीमा, जीवनोपयोगी वस्तुओं, ऑटोमोबाइल, होटल आदि विभिन्न वस्तुओं पर जीएसटी की दरें कम हो जाने से आम नागरिकों को बहुत राहत मिली है। इससे आने वाले त्योहारों एवं लगन में बिक्री बढ़ने की उम्मीद है। किन्तु जीएसटी 2.0 में बदलाव के साथ ही सरलीकरण की प्रक्रिया को अपनाना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि आज भी कई नियम हैं जो छोटे एवं मध्यम वर्ग के व्यापारियों की समझ से बाहर हैं। निम्नलिखित बिंदुओं पर विचार करना आवश्यक है:जैसे कपड़ों पर जीएसटी की दरें एक समान होनी चाहिए। वर्तमान में 2500 रुपये से अधिक की कीमत वाले कपड़ों पर 18% जीएसटी की दर से व्यापारियों को परेशानी हो रही है। इसे 5% करने से व्यापारियों को राहत मिलेगी। कम्पोजीशन एवं रेगुलर योजना के व्यापारियों के लिए समान जीएसटी दर होनी चाहिए, ताकि दोनों के बीच भेदभाव न हो। जीएसटी कलेक्शन बढ़ने के बावजूद सर्वे के नाम पर व्यापारियों का उत्पीड़न बंद होना चाहिए। किसी भी गलत व्यक्ति की शिकायत पर व्यापारियों को परेशान नहीं किया जाना चाहिए। विक्री के पश्चात टैक्स इनवॉइस में त्रुटि होने पर विभाग द्वारा दूसरे राज्य या शहर में माल को रोकने की बजाय विक्रेता के शहर या राज्य में ही सुनवाई होनी चाहिए। इनपुट टैक्स क्रेडिट के संबंध में व्यापारियों की चुनौतियों को समझना आवश्यक है। यदि क्रेता व्यापारी के पास जीएसटी इनपुट टैक्स पेड का बिल है और उक्त बिल का भुगतान किया जा चुका है, तो उस पर इनपुट क्रेडिट मिलना चाहिए। जीएसटी अनुपालन को सरल बनाने की आवश्यकता है। प्रत्येक गलती पर ब्याज और आर्थिक दंड की मात्रा बहुत अधिक है। कम कर जमा करने पर अर्थदंड के स्थान पर सिर्फ ब्याज का प्रावधान होना चाहिए। छोटे एवं मध्यम वर्ग के व्यापारियों के लिए गोदामों से माल मंगवाते समय ईवे बिल की सुविधा को सरल बनाया जाना चाहिए। 200000 रुपये तक के माल के आवागमन के लिए केवल चालान की अनुमति दी जानी चाहिए। ईवे बिल की समय सीमा के उल्लंघन के लिए व्यापारियों को दंडित करने की बजाय ट्रांसपोर्टर की गाड़ी खराब होने जैसी स्थितियों में आसानी से समय सीमा बढ़ाने का प्रावधान होना चाहिए।

बैठक में मुख्य रूप से राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रेम मिश्रा, राष्ट्रीय सचिव राजेंद्र गोयनका ,प्रदेश उपाध्यक्ष अशोक जायसवाल , यू आर सिंह , गोकुल शर्मा ,अनुज डिडवानिया, विक्रम सिंह बंटी , राकेश शर्मा , जिलाध्यक्ष अमित शेवारमानी, महामत्री कृष्णा मोदी , सुजीत गुप्ता , कौशल तिवारी , शुभम जायसवाल , अजय सिंह अधिवक्ता , विशाल अग्रवाल , स्मिता लोहिया , निधि जालान , वर्षा सेठ , अजय यादव आदि व्यापारी गण मौजूद रहे |
राष्ट्र के ९ करोड़ परम्परागत खुदरा व्यापारियों की ओर से मैं आपके माध्यम से भारत सरकार से अनुरोध करता हूँ कि जीएसटी की विसंगतियों में संशोधन किया जाए और राष्ट्र के अर्थव्यवस्था की सुदृढ़ता एवं युवाओं के रोजगार सुनिश्चित करने हेतु स्थानीय छोटे एवं मध्यम वर्ग के व्यापारियों को प्राथमिकता एवं आवश्यक सुविधा प्रदान की जाए।

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