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महात्मा ज्योतिराव फुले जयंती: सामाजिक न्याय और शिक्षा के अग्रदूत को नमन

Shekhar Pandey

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नई दिल्ली। देशभर में महान समाज सुधारक महात्मा ज्योतिराव फुले की जयंती श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई जा रही है। इस वर्ष उनका 200वां जयंती वर्ष भी शुरू हो रहा है, जिससे इस अवसर का महत्व और बढ़ गया है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस अवसर पर देशवासियों को संबोधित करते हुए महात्मा फुले के जीवन और उनके विचारों को याद किया। उन्होंने कहा कि महात्मा फुले का जीवन नैतिक साहस, शिक्षा के प्रति समर्पण और समाज के वंचित वर्गों के उत्थान के लिए निरंतर संघर्ष का प्रतीक है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि 1827 में एक साधारण परिवार में जन्मे महात्मा फुले ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद शिक्षा को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया। उन्होंने समाज में व्याप्त असमानताओं को दूर करने के लिए लड़कियों और वंचित वर्गों के लिए विद्यालय खोले और शिक्षा को समानता का माध्यम बनाया।

उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि महात्मा फुले का मानना था कि जब तक समाज के सभी वर्गों को समान अधिकार नहीं मिलते, तब तक सच्ची स्वतंत्रता संभव नहीं है। इसी उद्देश्य से उन्होंने ‘सत्यशोधक समाज’ की स्थापना की, जो सामाजिक सुधार और समानता के लिए एक महत्वपूर्ण आंदोलन बना।

प्रधानमंत्री ने महात्मा फुले की धर्मपत्नी सावित्रीबाई फुले के योगदान को भी याद करते हुए कहा कि उन्होंने भारत की पहली महिला शिक्षिकाओं में शामिल होकर महिलाओं की शिक्षा को नई दिशा दी।

उन्होंने अपने संदेश में कहा कि आज के समय में महात्मा फुले के विचार और भी प्रासंगिक हैं। देश में युवाओं के लिए शिक्षा, शोध और नवाचार को बढ़ावा देकर एक समावेशी और सशक्त समाज के निर्माण की दिशा में कार्य किया जा रहा है।

अंत में प्रधानमंत्री ने देशवासियों से आह्वान किया कि वे महात्मा फुले के आदर्शों को अपनाएं और शिक्षा, समानता तथा सामाजिक न्याय के मार्ग पर चलकर राष्ट्र निर्माण में योगदान दें।

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