रामकटोरा में श्रीमद्भागवत कथा का विश्राम, हजारों श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया महाप्रसाद

Shekhar pandey
वाराणसी। श्री कृष्ण उत्सव सेवा समिति एवं हैहय वंशीय क्षत्रिय कसेरा महासभा तथा वाराणसी केराना व्यापार समिति द्वारा आयोजित रामकटोरा स्थित चिन्तामणी बाग में पातालपुरी महन्त बालक दास ने श्रीमद्भागवत कथा के सातवें एवं अंतिम दिवस पर बताया कि दुनिया में ग्रहण तीन प्रकार के होते हैं, पहला चन्द्र ग्रहण, दूसरा सूर्य ग्रहण और तीसरा पाणि ग्रहण, जिसमें चन्द्र ग्रहण एवं सूर्य ग्रहण तो आते-जाते रहते हैं, लेकिन पाणिग्रहण वह ग्रहण है, जो मानव जाति के लिए प्रेम बन्धन है, जिसके साथ पाणिग्रहण हुआ तो उसका हाथ अपने जिन्दगी भर पकड़ कर प्रेमपूर्वक अपना जीवन बिता दें।
भगवान ने मथुरा में आकर पापाचारी, अत्याचारी, अनाचारी कंस का वध किया, रूकमणी और राधा रानी का अंतर समझाया। हर मंदिरों में या जहाँ जहाँ भी श्री कृष्ण की मूर्ति होती है, वहां उनके साथ राधा जी की मूर्ति ही क्यों होती है, जबकि माता रूकमणी से विवाह हुआ, माँ रूकमणी लक्ष्मी स्वरूपा हैं। आचार्य ने भक्त सुदामा के चरित्र पर कथा बहुत मार्मिक ढंग से सुनाया, कथा इतनी भक्तिमय एवं रसमय थी कि पंडाल में बैठे हुए अपार जनसमूह श्रद्धालु भक्तों के आँखों से आँसू की अविरल धारा बहने लगी। व्यास जी द्वारा बताया गया कि भगवान अपने भक्तों की सदैव परिपूर्णता का ध्यान रखते हैं, बस उनके चरण शरण में अपने को अर्पण करने की आवश्यकता है। आप श्रद्धा से याद करो, थोड़ा अर्पण करो, ढेरों सम्पन्नता प्राप्त करो, मनोवांछित फल पाओ। जरूरत है सिर्फ प्रभु पर अटूट विश्वास भरोसा एवं समर्पण की।
सात दिनों से प्रारम्भ श्रीमद्भागवत का पारायण पूर्ण होने पर आचार्य कलाधर गुरू ने हवन कर पूर्णाहुति सम्पन्न कराया। कथा के समापन पर संस्था द्वारा सभी भक्तों के लिए प्रसाद वितरण के साथ साथ महाप्रसाद (भण्डारा) की भी व्यवस्था की गई थी। भागवत् के विश्राम की आरती को इक्कीस श्रद्धालु भक्तों ने किया। सभी का स्वागत भाषण अध्यक्ष अशोक कसेरा ने किया और सुंदर आयोजन के लिए सभी को बधाई देकर स्मृति चिन्ह एवं अंगवस्त्रम् के साथ सम्मानित कर आभार व्यक्त किया। धन्यवाद ज्ञापन संस्था के महामंत्री विनोद कसेरा एवं कोषाध्यक्ष भईया लाल ने किया। महाप्रसाद की वितरण व्यवस्था मनीष कसेरा, सोनू कसेरा, विष्णु कसेरा, जय प्रकाश अन्ना, मंचू कसेरा, पवन कसेरा, शिवम कसेरा, अनिल कसेरा, अरूण कसेरा, पप्पू कसेरा, बुद्धलाल कसेरा, विजय बिजलीवाले, आकाश कसेरा, भरत कसेरा ने सुचारू रूप से सम्पन्न कराया।







