आनंद परमानंद जयंती पर विचार और काव्य की गरिमामयी संध्या

Aniket pandey
वाराणसी, 1 मई 2026।
साहित्य और संस्कृति की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाते हुए “आनंद परमानंद जयंती–2026” का भव्य आयोजन मैदागिन स्थित पराड़कर भवन में श्रद्धा और गरिमा के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम में शहर के प्रमुख साहित्यकारों, शिक्षाविदों, शोधार्थियों और कला प्रेमियों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।

कार्यक्रम का शुभारंभ जनकवि आनंद परमानंद के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। इसके बाद आयोजित विचार गोष्ठी में ‘जनकवि आनंद परमानंद’ विषय पर विद्वानों ने गहन और सारगर्भित विचार रखे। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. श्रद्धानंद (पूर्व विभागाध्यक्ष, हिंदी विभाग, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ) ने की।
मुख्य वक्ताओं में डॉ. मधुकर मिश्र, डॉ. इंदीवर, डॉ. राम सुधाकर सिंह तथा डॉ. बलराज पांडे ने आनंद परमानंद के साहित्यिक योगदान, जनपक्षधरता और सामाजिक सरोकारों पर प्रकाश डालते हुए उन्हें जनभावनाओं का सशक्त स्वर बताया।
‘स्मृति सत्र’ में शतरुद्र प्रकाश और टीकाराम शर्मा ने अपने संस्मरण साझा किए, जिससे वातावरण भावुक और प्रेरणादायक बन गया।
द्वितीय चरण में आयोजित काव्य गोष्ठी ‘काव्यांजलि’ में कवियों ने अपनी रचनाओं का प्रभावशाली पाठ कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस दौरान संवेदना, व्यंग्य, प्रेम और सामाजिक यथार्थ के विविध आयाम देखने को मिले।
कार्यक्रम के दौरान तीन साहित्यकारों को “श्री आनंद परमानंद साहित्य सम्मान–2026” से सम्मानित किया गया। ग़ज़ल संग्रह “सड़क पर ज़िंदगी” के प्रकाशक डॉ. उमाशंकर चतुर्वेदी ‘कंचन’ एवं डॉ. विनोद राव पाठक को विशेष सम्मान प्रदान किया गया, जबकि वरिष्ठ कवि डॉ. राम अवतार पांडे को उनके समग्र साहित्य सृजन के लिए सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. धर्मेंद्र गुप्त ‘साहिल’ ने किया। सायं 5 बजे आरंभ हुआ यह आयोजन एक यादगार और प्रेरणादायक साहित्यिक संध्या के रूप में संपन्न हुआ।
अंत में आयोजकों ने सभी अतिथियों एवं सहभागियों का आभार व्यक्त किया।












