राष्ट्रीय

भोजन ही नहीं, बच्चों को बेहतर पोषण और माहौल भी जरूरी

Shekhar Pandey

भारत में बच्चों के शारीरिक विकास के साथ-साथ मानसिक और सामाजिक विकास को लेकर चिंता लगातार बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि शुरुआती पांच वर्ष बच्चों के मस्तिष्क विकास के लिए सबसे महत्वपूर्ण होते हैं, लेकिन इस दौरान सही पोषण और उचित वातावरण नहीं मिलने से बच्चों का विकास प्रभावित हो रहा है।

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बाल चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार कोविड-19 महामारी के दौरान लंबे समय तक स्कूल बंद रहने, बच्चों के घरों में सीमित रहने, खेलकूद कम होने और स्क्रीन टाइम बढ़ने का असर उनके मानसिक और सामाजिक विकास पर पड़ा। कई बच्चों में भाषा, व्यवहार और सीखने की क्षमता प्रभावित हुई।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार बच्चे के मस्तिष्क का लगभग 90 प्रतिशत विकास पांच वर्ष की आयु से पहले हो जाता है। इस दौरान आयरन, जिंक, सेलेनियम, डीएचए और कोलीन जैसे पोषक तत्व मस्तिष्क के विकास में अहम भूमिका निभाते हैं। हालांकि राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस-5) के आंकड़ों के मुताबिक भारत में पांच वर्ष से कम उम्र के करीब आधे बच्चे आयरन की कमी से प्रभावित हैं और 67 प्रतिशत से अधिक बच्चे एनीमिया से ग्रसित हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों के बेहतर विकास की शुरुआत गर्भावस्था से ही हो जाती है। गर्भवती महिलाओं को पर्याप्त पोषण, आयरन और फोलिक एसिड मिलना बेहद जरूरी है। इसके बावजूद देश में केवल 44 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं ही निर्धारित अवधि तक आयरन-फोलिक एसिड का सेवन कर पाती हैं।

किशोरियों में एनीमिया भी बड़ी चुनौती बना हुआ है। आंकड़ों के अनुसार देश में करीब 59 प्रतिशत किशोरियां एनीमिया से पीड़ित हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि किशोरियों के स्वास्थ्य और पोषण पर निवेश करना आने वाली पीढ़ियों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए जरूरी है।

विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि केवल पौष्टिक भोजन ही पर्याप्त नहीं है। बच्चों के मानसिक विकास के लिए परिवार का सहयोग, बातचीत, खेलकूद, सामाजिक संपर्क और सकारात्मक माहौल भी उतना ही जरूरी है। महामारी के दौरान बच्चों में सामाजिक संपर्क कम होने से उनके विकास पर नकारात्मक असर देखने को मिला।

सरकार की पोषण अभियान और पीएम पोषण जैसी योजनाओं को इस दिशा में महत्वपूर्ण बताया गया है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि आंगनवाड़ी और सामुदायिक स्तर पर चलने वाले कार्यक्रमों में पोषण के साथ-साथ बच्चों के मानसिक और सामाजिक विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जाए।

विशेषज्ञों के मुताबिक शुरुआती बचपन में सही पोषण और बेहतर देखभाल बच्चों के भविष्य, शिक्षा और देश के विकास की मजबूत नींव साबित हो सकती है।

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