विकास प्राधिकरण पर उत्पीड़न का आरोप, ग्रामीणों ने प्रेसवार्ता कर उठाई आवाज

Shekhar Pandey
वाराणसी/चंदौली। आज बात उत्तर प्रदेश के चंदौली और वाराणसी सीमा पर बसे उन ग्रामीणों की, जो अपनी ही पुश्तैनी जमीन होने के बावजूद आशियाना बनाने के लिए दर-दर भटक रहे हैं। मामला नियामताबाद विकास खंड के ग्राम सभा कुंडा खुर्द और भिसौंडी का है, जहाँ विकास प्राधिकरण के मानकों ने ग्रामीणों की रातों की नींद उड़ा दी है। इसी मामले को लेकर शुक्रवार को गोलघर स्थित पराड़कर स्मृति भवन में ग्रामीणों ने एक प्रेस वार्ता कर अपनी व्यथा सुनाई। ग्रामीणों का कहना है कि पड़ाव-सहजौर मार्ग के उत्तर दिशा में स्थित उनकी जमीनें गंगा नदी से करीब 1500 मीटर की दूरी पर हैं। बावजूद इसके, वहां निर्माण कार्य पर रोक लगी हुई है। गंगा से 1500 मीटर और रिंग रोड से 1500 मीटर गांव दूरी पर है। ग्रामीणों का दावा है कि इस क्षेत्र में गंगा की बाढ़ का प्रभाव नहीं रहता। जबकि बगल के गांव ‘कुंडा कला’ में 500 मीटर तक आवासीय क्षेत्र घोषित है, तो ‘कुंडा खुर्द’ के साथ भेदभाव क्यों? मार्ग के दक्षिण की 50 प्रतिशत जमीन राजकीय कार्यों के लिए आवंटित है, जिससे ग्रामीणों के पास निर्माण के लिए जगह सीमित हो गई है। ग्राम प्रधान प्रतिनिधियों ने कहा कि मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री से लेकर विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष तक को पत्रक दिया गया है। संविधान का अनुच्छेद 14 हमें समानता का अधिकार देता है, लेकिन एक ही भौगोलिक स्थिति में हमारे लिए अलग और पड़ोस के गांव के लिए अलग मानक क्यों हैं? हम अपना घर कहाँ बनाएं? शासन से ग्रामीणों ने मांग की है कि पड़ाव-सहजौर मार्ग के उत्तर दिशा में 500 मीटर तक की भूमि को ‘आवासीय’ या ‘मिश्रित भूमि’ (एचएफएलइ) के रूप में परिवर्तित किया जाए। प्रेस वार्ता में मुख्य रूप से प्रधान प्रतिनिधी ग्राम भिसौडी सत्य प्रकाश यादव, प्रधान प्रतिनिधि ग्राम कलाखुर्द अखिलेश यादव, चंद्रजीत यादव सहित अनेकों ग्रामीण मौजूद रहे।













