मिशन कर्मयोगी से बदल रहा प्रशासनिक ढांचा, आईगॉट प्लेटफॉर्म से सशक्त हो रहे सरकारी कर्मचारी: डॉ. जितेंद्र सिंह

Nispaksh kashi
नई दिल्ली। केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि ‘मिशन कर्मयोगी’ भारतीय शासन व्यवस्था में व्यापक परिवर्तन लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो रहा है। उन्होंने बताया कि यह मिशन प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों को पारंपरिक प्रशिक्षण प्रणाली से आगे बढ़ाकर निरंतर, भूमिका-आधारित और तकनीक-संचालित सीखने की प्रक्रिया से जोड़ रहा है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पहले किसी अधिकारी को नई योजना की जानकारी के लिए लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था, जबकि अब ‘आईगॉट’ (इंटीग्रेटेड गवर्नमेंट ऑनलाइन ट्रेनिंग) प्लेटफॉर्म के माध्यम से वह कुछ ही मिनटों में आवश्यक प्रशिक्षण प्राप्त कर सकता है। इससे प्रशासनिक कार्यों में तेजी और दक्षता दोनों बढ़ी हैं।
डॉ. सिंह के अनुसार, वर्ष 2021 में शुरू किए गए इस मिशन का उद्देश्य सिविल सेवकों को ‘कर्मचारी’ से ‘कर्मयोगी’ के रूप में विकसित करना है, जो सेवा भावना और उत्कृष्टता के साथ कार्य करें। उन्होंने बताया कि आईगॉट प्लेटफॉर्म पर अब 1.5 करोड़ से अधिक सरकारी कर्मचारी जुड़े हैं और 4600 से अधिक पाठ्यक्रमों के माध्यम से 8 करोड़ से ज्यादा प्रशिक्षण पूरे किए जा चुके हैं।
उन्होंने कहा कि यह प्लेटफॉर्म किसी भी समय, कहीं भी और कई भाषाओं में उपलब्ध है, जिससे देश के दूरदराज क्षेत्रों में कार्यरत कर्मचारी भी आसानी से प्रशिक्षण प्राप्त कर पा रहे हैं। पाठ्यक्रमों को नियमित रूप से अपडेट किया जाता है ताकि वे वर्तमान जरूरतों के अनुरूप बने रहें।
डॉ. सिंह ने बताया कि क्षमता निर्माण आयोग इस पूरे तंत्र का संचालन कर रहा है, जो विभिन्न सरकारी भूमिकाओं के अनुसार आवश्यक कौशल की पहचान कर प्रशिक्षण की गुणवत्ता सुनिश्चित करता है। देशभर के 200 से अधिक प्रशिक्षण संस्थानों को मान्यता दी जा चुकी है और सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के साथ समन्वय स्थापित किया गया है।
उन्होंने कहा कि मिशन कर्मयोगी का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों के दृष्टिकोण में बदलाव लाना भी है, जिससे वे नागरिकों के प्रति अधिक संवेदनशील और जवाबदेह बन सकें। ‘नागरिक देवो भव’ की भावना के साथ काम करने की दिशा में यह पहल कारगर साबित हो रही है।
डॉ. सिंह ने यह भी कहा कि मिशन के तहत भारतीय ज्ञान परंपरा को भी प्रशिक्षण का हिस्सा बनाया जा रहा है, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था में भारतीय दृष्टिकोण को बढ़ावा मिल सके। ‘अमृत ज्ञान कोष’ के माध्यम से देशज अनुभवों और केस स्टडी का संकलन किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि 2 से 8 अप्रैल तक ‘साधना’ सप्ताह के रूप में राष्ट्रीय शिक्षण सप्ताह मनाया जा रहा है, जिसमें देशभर के हजारों अधिकारी भाग ले रहे हैं। इस दौरान सिविल सेवा प्रशिक्षण संस्थानों का राष्ट्रीय सम्मेलन भी आयोजित किया जा रहा है।
डॉ. सिंह ने कहा कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में प्रशिक्षित, सक्षम और नागरिक-केंद्रित सरकारी कर्मचारियों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी। मिशन कर्मयोगी इसी दिशा में एक मजबूत आधार तैयार कर रहा है।








