उत्तर प्रदेशवाराणसी

Varanasi : जगद्गुरुश्री वल्लभाचार्य महाप्रभु प्राकट्य महोत्सव पर रंगारंग सांस्कृतिक संपन्न

Shekhar Pandey

Advertisements

वाराणसी । श्री शुद्धाद्वैत जप यज्ञ समिति की ओर से गुरुवार को चौखम्भा स्थित वल्लभगीता कृष्ण भवन में गोस्वामी 108 श्री कल्याणराय महाराज की अध्यक्षता में विविध रंगारंग सांस्कृतिक, संगीतमय नाट्य प्रस्तुति से वैष्णवजन आनन्द परमानन्द रूप से भाव विभोर होगे। सुविख्यात रंगकर्मी अनुप अग्रवाल एवं विनीता नागपुरी के निर्देशन में अन्तर्मन का आश्रय विवेक धैर्य आश्रय जो एक धोबी की वार्ता पर आधारित है। यह केवल वार्ता साहित्य की एक कहानी नहीं है, अपितु जीवन के नैतिक मूल्यों के तीन स्तम्भो-विवेक धैर्य और आश्रय का सजीव चित्रण है। संघर्ष एवं संशय की धड़ी में जो मनुष्य विवेक, धैर्य के साथ अडिग रहता है वही प्रभु के सच्चे पुष्टिमार्गका अनुगामी बनता है। विवेक जब हृदय में स्थिर हो जाये तभी उसे श्रीकृष्ण की कृपा से सतसंग मिलता है। प्रभु मेरे अपने सर्वस्व है। धैर्य प्रेम का सच्चा रूप प्रभु के प्रति पूर्ण निष्काम सर्मपण है। प्रभु आपका दास हुं तुम मेरे स्वामी हो, राधाजी मेरी स्वामिनी है।

प्रभु श्री कृष्ण राधा की हर लीला में प्रभु के सुख का ही विचार करता है। यही पुष्टिमार्ग का मूल तत्व है। अंतर्मन नाट्य प्रस्तुति में गोसाई श्री विट्ठलनाथ प्रभु की भूमिका में गोस्वामी 108 श्री सुरेश बाबा का स्वरूप एवं चंद्रावली सखी के स्वरूप वल्लभकुलभूषण अखंडसौभाग्यवती गोस्वामी किर्तना बहू जी महाराज का अभिनय वैष्णवजनों को विशेष प्रभावित किया। विकास दीक्षित ने मंगलाचरण आरती बेन, नेहा शुक्ला, चन्द्रकांत सोनी, श्रयत खन्ना, सरस गुजराती की भूमिका विशेष सराहनीय रही। धोबी का किरदार बाल कलाकार सुश्री तनु ने नाट्य मंचन को जीवंत कर दिया। हृदय स्पर्शी व प्ररणादासी प्रस्तुति से गीता भवन सभागार तालियों की गडगडाहट से गुंजायमान रहा। वैष्णवी का परम कर्तव्य है कि इस नाटक मंचन से प्रेरणा लेकर अपने जीवन को सार्थक करें। आचार्य गोस्वामी सुरेशबाबा, वल्लभबाबा, घनश्यामबाबा, अखंड सौभाग्यवती श्रीआभा बहुजी की गरिमामय उपस्थिति से वैष्णवजन कृतार्थ हुए। गोस्वामी कल्याण राय महाराज जी ने अपने आर्शीवचन देते हुए सभी कलाकारों के उज्जवल भविष्य की शुभकामना दी और उन्हें पुरस्कृत किया। अंकित पारिख पखावजी, बीडी गुजराती, पंडित अशोक शर्मा, अशोक बल्लभदास, द्वारका अढ़तीया, रमेश जोशी, संजय नागर, पंडित विकास दीक्षित, पंडित रमेश उपमन्यु शास्त्री, पंडित मदन मोहन शास्त्री, श्यामदास नागर, बृजरानी अग्रवाल, बृजमाधुरी अग्रवाल, मंजू अग्रवाल, राधा नागर आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। नाट्य का लेखन अनूप अग्रवाल और संगीत निर्देशन विनीता नागपुरी एवं संरचना साज सज्जा वल्लभकुलभूषण अ.सौ. कीर्तना बहू ने किया।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button