उत्तर प्रदेशवाराणसी

सलीम सुहरवर्दी का निधन पत्रकारिता और साहित्य की अपूर्णीय क्षति , काशी पत्रकार संघ में आयोजित शोक सभा में दी गयी भावभीनी श्रद्धांजलि

संपादक आशुतोष पाण्डेय

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वाराणसी । हिन्दी, उर्दू, अरबी और फारसी भाषा पर समान अधिकार रखने वाले वरिष्ठ पत्रकार सलीम सुहरवर्दी का निधन न सिर्फ पत्रकारिता जगत बल्कि उर्दू साहित्य की भी अपूर्णीय क्षति है। काफी लम्बे समय से अस्वस्थता के बावजूद सलीम जी पठन, पाठन और लेखन से खुद को जुदा नहीं किया। काशी पत्रकार संघ में शनिवार को आयोजित शोक सभा में वक्ताओं ने उनको अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। वक्ताओं ने कहा कि सलीम सुहरवर्दी का जाना पत्रकारिता जगत के लिए बहुत दुख की घड़ी है। जब तक वह जिन्दा थे पत्रकारिता और साहित्य सेवा उनका ओढ़ना-बिछौना था। उर्दू दैनिक ‘आजाद’ से शुरू हुआ उनका सफर उर्दू दैनिक ‘हिन्दुस्तान’, ‘आज’, ‘आवाज-ए-मुल्क’ में अनवरत चलता रहा। इसके अलावा विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में उनके लेख छपते रहे। अल्पसंख्यक समुदाय की समस्याओं को बखूबी उजागर करते रहे। कई युवा पत्रकारों के वे प्रेरणास्रोत रहे। वक्ताओं ने कहा कि सिर्फ पत्रकारिता और साहित्य ही नहीं बल्कि उर्दू शायरी के लिए काफी मशहूर रहे। ईद मिलादुन्नवी के मौके पर वो विभिन्न नात पढ़ने वाली अंजुमनों को अपना कलाम देते थे। वो गंगा जमुनी तहजीब के लिए मशहूर नजीर बनारसी के शागिर्द थे। फारसी युक्त उर्दू भाषा को हिन्दी अनुवाद करने में भी महारत हांसिल थी। सलीम जी के दामाद समीर ने भावुक होकर कहा कि उन्होंने कभी मुझे पिता की कमी महसूस होने नहीं दी। शोक सभा के अन्त में दो मिनट का मौन रख कर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गयी। संचालन महामंत्री जितेन्द्र कुमार श्रीवास्तव ने किया। शोक सभा में अध्यक्ष अरुण मिश्र, उपाध्यक्ष सुनील शुक्ला, पूर्व अध्यक्ष योगेश कुमार गुप्त, पूर्व महामंत्री अखिलेश मिश्र, रमेश राय, मिर्जा अतहर हुसैन, कौसर अली कुरैशी, मोहम्मद अश्फाक सिद्दीकी, विनय शंकर सिंह, देव कुमार केशरी, विजय शंकर गुप्ता, डा॰ शैलेन्द्र भारती, मुन्ना लाल साहनी, आशुतोष पाण्डेय, डा॰ जिनेश कुमार, दिलीप कुमार, रेयाज अहमद नूर आदि ने अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

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