शास्त्री और गांधी जयंती पर संगोष्ठी, सादगी और देशसेवा के आदर्शों को किया याद

Shekhar pandey
वाराणसी, 2 अक्टूबर। पूर्व प्रधानमंत्री एवं भारत रत्न लाल बहादुर शास्त्री और राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर शुक्रवार को सिगरा स्थित शास्त्री उद्यान में ग्लोबल कायस्थ कमेटी, वाराणसी की ओर से संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में दोनों महापुरुषों के जीवन, विचारों और देश के प्रति उनके योगदान को याद किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत शास्त्री विद्यालय परिसर स्थित लाल बहादुर शास्त्री की प्रतिमा पर माल्यार्पण से हुई। इस दौरान उपस्थित लोगों ने शास्त्री जी के आदर्शों को याद करते हुए उनके सम्मान में नारे लगाए। कार्यक्रम में अधिवक्ता समाज से जुड़े प्रबुद्धजनों का भी स्वागत किया गया।
संगोष्ठी की अध्यक्षता ग्लोबल कायस्थ कमेटी के संस्थापक शशिकांत श्रीवास्तव ने की, जबकि संचालन अधिवक्ता शिव कुमार सिन्हा ने किया।
शशिकांत श्रीवास्तव ने कहा कि लाल बहादुर शास्त्री का जीवन सादगी, ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा का उदाहरण है। उनका दिया गया ‘जय जवान, जय किसान’ का संदेश आज भी देशसेवा की भावना को प्रेरित करता है।
अधिवक्ता शिवजी सिन्हा ने कहा कि 1965 के युद्ध के दौरान शास्त्री जी ने देश को एकजुट किया और जवानों तथा किसानों के मनोबल को मजबूत किया। उन्होंने कहा कि शास्त्री जी की नैतिक राजनीति और त्याग आज भी समाज के लिए प्रेरणादायक है।
अधिवक्ता कृपा शंकर श्रीवास्तव ने कहा कि शास्त्री जी ने अपने आचरण से सार्वजनिक जीवन में नैतिकता की मिसाल कायम की। उन्होंने रेल दुर्घटना के बाद रेल मंत्री के पद से इस्तीफा देने की घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि शास्त्री जी का जीवन सादगी और जिम्मेदारी का संदेश देता है।
कार्यक्रम में अरविंद श्रीवास्तव, शैलेंद्र श्रीवास्तव ‘मुन्ना’ (पूर्व पार्षद), राजेश श्रीवास्तव ‘गुड्डू भैया’, विंध्याचल श्रीवास्तव, ज्योति कुमार श्रीवास्तव (अधिवक्ता), शशिकांत श्रीवास्तव (अधिवक्ता), कृपा शंकर श्रीवास्तव (अधिवक्ता), राजेश कुमार दुबे (अधिवक्ता), प्रमोद श्रीवास्तव (अधिवक्ता), शुभम निर्मल, शिवकुमार सिन्हा (अधिवक्ता) और आशीष श्रीवास्तव समेत अन्य लोग मौजूद रहे।







