Delhi : भारत की औषधि रणनीति अब नवाचार की ओर: जगत प्रकाश नड्डा

Shekhar Pandey
नई दिल्ली। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने कहा है कि भारत की औषधि रणनीति अब केवल पैमाने (स्केल) तक सीमित नहीं है, बल्कि नवाचार की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है, जिससे देश को बायोफार्मा और उच्च-मूल्य चिकित्सा विज्ञान का वैश्विक केंद्र बनाया जा सके।
उन्होंने कहा कि वैश्विक औषधि बाजार में बायोलॉजिक, बायोसिमिलर और विशेष दवाओं की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत से अधिक हो चुकी है। ऐसे में ‘विश्व की फार्मेसी’ के रूप में पहचान बना चुका भारत अब जेनरिक दवाओं के साथ-साथ नवाचार आधारित दवा निर्माण पर भी जोर दे रहा है।
नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने इस दिशा में ठोस नीतिगत कदम उठाए हैं। केंद्रीय बजट 2026-27 में ₹10,000 करोड़ के मिशन बायोफार्मा निर्माण शक्ति की घोषणा को इस बदलाव का महत्वपूर्ण आधार बताया गया है। इसका उद्देश्य अगले 8–10 वर्षों में भारत को बायोफार्मा नवाचार का वैश्विक केंद्र बनाना है।
मंत्री ने बताया कि इस योजना के तहत बायोलॉजिक्स, बायोसिमिलर और उन्नत चिकित्सा क्षेत्रों में घरेलू क्षमताओं को बढ़ावा दिया जाएगा। साथ ही, अनुसंधान एवं विकास (R&D) को प्रोत्साहित करने, उद्योग और अकादमिक संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाने तथा नवाचार आधारित पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
उन्होंने किण्वन-आधारित निर्माण (Fermentation-based manufacturing) को रणनीति का अहम स्तंभ बताते हुए कहा कि एंटीबायोटिक्स, वैक्सीन और एंजाइम उत्पादन में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए सरकार निवेश, तकनीकी विकास और प्रोत्साहन योजनाओं पर कार्य कर रही है।
इसके अलावा, देश में 1,000 नए मान्यता प्राप्त नैदानिक परीक्षण केंद्र स्थापित किए जाएंगे, जिससे भारत वैश्विक दवा विकास के लिए एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभरेगा। नियामक प्रक्रियाओं के डिजिटलीकरण और तेजी से अनुमोदन से वैश्विक निवेशकों का भरोसा भी बढ़ेगा।
नड्डा ने कहा कि पीएलआई योजना और बल्क ड्रग पार्क जैसी पहलों से सक्रिय औषधि सामग्री (API) के घरेलू उत्पादन में वृद्धि हुई है, जिससे दवाएं सस्ती हुई हैं। प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना के तहत 19,000 से अधिक केंद्रों के माध्यम से आम लोगों को किफायती दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि अनुसंधान एवं विकास में निवेश बढ़ाना अभी भी चुनौती है, जिसके लिए सार्वजनिक-निजी साझेदारी को और मजबूत करने की आवश्यकता है।
अंत में उन्होंने कहा कि भारत का औषधि बाजार, जिसका आकार ₹4 लाख करोड़ से अधिक है, आने वाले वर्षों में और विस्तार करेगा। देश न केवल जेनरिक दवाओं में अग्रणी रहेगा, बल्कि नवाचार आधारित दवाओं और आधुनिक चिकित्सा सेवाओं में भी वैश्विक नेतृत्व की ओर बढ़ रहा है।







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