रामेश्वर मठ में शंकराचार्य ने बताया भक्ति और सत्संग का महत्व

Shekhar pandey
काशी। नागपंचमी एवं श्रावण मास के तृतीय सोमवार के पावन अवसर पर चातुर्मास महाव्रत के अंतर्गत रामेश्वर मठ में नित्य सत्संग का आयोजन हुआ। इस अवसर पर काशी धर्मपीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री नारायणानंद तीर्थ जी महाराज ने “भक्ति सुतंत्र सकल सुख खानी, बिनु सत्संग न पावहिं प्रानी” चौपाई के माध्यम से श्रद्धालुओं को भक्ति और सत्संग का आध्यात्मिक महत्व समझाया।
शंकराचार्य जी महाराज ने कहा कि भक्ति मनुष्य के जीवन को भीतर से बदलने वाली शक्ति है। भक्ति के माध्यम से व्यक्ति के मन में भगवान के प्रति प्रेम, श्रद्धा, विश्वास और समर्पण का भाव उत्पन्न होता है। उन्होंने कहा कि सांसारिक सुखों के पीछे भागने के बजाय मनुष्य को आत्मिक शांति और परम आनंद की प्राप्ति के लिए ईश्वर भक्ति का मार्ग अपनाना चाहिए।
उन्होंने सत्संग को भक्ति जागरण का महत्वपूर्ण माध्यम बताते हुए कहा कि संतों का सानिध्य और सद्विचार व्यक्ति के जीवन की दिशा बदल सकते हैं। सत्संग से मनुष्य को जीवन के वास्तविक उद्देश्य का बोध होता है तथा धर्म, सदाचार, सेवा और आध्यात्मिक साधना के प्रति उसकी रुचि बढ़ती है।
महाराज श्री ने चातुर्मास को आत्मचिंतन, साधना, स्वाध्याय और सत्संग का विशेष काल बताते हुए श्रद्धालुओं से इस अवधि का सदुपयोग करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में अच्छे संस्कारों को अपनाने तथा नकारात्मक विचारों और विकारों से दूर रहने का प्रयास करना चाहिए।
सैकड़ों श्रद्धालुओं ने किया सत्संग श्रवण
सत्संग में कार्यक्रम प्रभारी आनंद स्वरूप ब्रह्मचारी जी महाराज, प्रवक्ता विनय तिवारी एडवोकेट, अनुपम द्विवेदी, मंडल उपाध्यक्ष भाजपा महामना क्षेत्र काशी, आचार्य अनुज मिश्रा, धरणीधर त्रिपाठी सहित सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे। श्रद्धालुओं ने शंकराचार्य जी महाराज के आध्यात्मिक प्रवचनों का श्रवण कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
रामेश्वर मठ में चातुर्मास महाव्रत का क्रम 28 सितंबर तक जारी रहेगा। प्रतिदिन प्रातः 7 से 8 बजे तथा सायंकाल 5 से 7 बजे तक सत्संग आयोजित किया जा रहा है। श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर सत्संग का लाभ लेने की अपील की गई है।







