ससुराल में महादेव: पंचतीर्थ-पंचकूप के महाजल से 501 श्रद्धालु करेंगे पार्थिव शिवलिंगों का सामूहिक अभिषेक

Shekhar pandey
वाराणसी। काशी की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं में 25 अगस्त, मंगलवार का दिन विशेष होने जा रहा है। लोकमान्यता के अनुसार सावन मास में भगवान शिव अपने परिवार के साथ ससुराल सारनाथ स्थित सारंगनाथ महादेव मंदिर में विराजमान होते हैं। इसी मान्यता को जीवंत करते हुए सारनाथ में बाबा विश्वनाथ के सम्मान में भव्य पार्थिव शिवलिंग महाअभिषेक और झुलनोत्सव का आयोजन किया जाएगा।
इस धार्मिक आयोजन का संयुक्त रूप से आयोजन सामूहिक रुद्राभिषेक पीठम, शिव बारात समिति और शिवांजलि द्वारा किया जा रहा है। आयोजन को लेकर तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं।
श्रेयांसनाथ जन्मस्थली से निकलेगी बाबा की पालकी
मुख्य आयोजन से पहले बाबा विश्वनाथ की प्रतीकात्मक पालकी यात्रा निकाली जाएगी। पालकी यात्रा सारनाथ स्थित जैन तीर्थंकर श्रेयांसनाथ की जन्मस्थली से गाजे-बाजे के साथ शुरू होकर सारनाथ के प्रमुख मार्गों से होते हुए सारंगनाथ महादेव मंदिर पहुंचेगी।
501 श्रद्धालु बनाएंगे पार्थिव शिवलिंग
सारंगनाथ मंदिर पहुंचने के बाद मुख्य धार्मिक अनुष्ठान शुरू होगा। आयोजन में 501 श्रद्धालु परिवार अपने हाथों से मिट्टी के पार्थिव शिवलिंगों का निर्माण करेंगे। इसके बाद वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ इन सभी पार्थिव शिवलिंगों का सामूहिक रुद्राभिषेक किया जाएगा।
पंचतीर्थ और पंचकूप के जल से होगा अभिषेक
महाअभिषेक के लिए काशी के पवित्र जलस्रोतों से जल एकत्र किया जा रहा है। इसमें सर्वऔषधियों के साथ पंचनद तीर्थ और पंचकूपों का पवित्र जल मिलाया जाएगा।
पंचनद तीर्थ में गंगा, यमुना, सरस्वती, किरणा और धूतपापा नदियों के जल को शामिल किया जाएगा। वहीं पंचकूपों में ज्ञानकूप, चंद्रकूप, नागकूप, धन्वंतरि कूप और मणिकर्णिका स्थित चक्रपुष्करिणी कूप का जल शामिल होगा।
चंद्रमौलिश्वर स्वरूप में देंगे दर्शन
अभिषेक के बाद बाबा विश्वनाथ का विशेष श्रृंगार किया जाएगा। इस दौरान बाबा चंद्रमौलिश्वर स्वरूप में भक्तों को दर्शन देंगे। इसके बाद भगवान विश्वनाथ, माता पार्वती, भगवान गणेश और कार्तिकेय के साथ प्रतीकात्मक रूप से हिंडोले पर विराजमान होंगे।
प्रदोष काल में होने वाला यह झुलनोत्सव महादेव के ससुराल आगमन की लोकपरंपरा से जुड़ा है। इसमें भगवान शिव का दामाद के रूप में स्वागत और विशेष सत्कार किया जाता है।
जीजा-साले के मिलन की परंपरा से जुड़ा सारंगनाथ
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार सारनाथ का सारंगनाथ मंदिर भगवान विश्वनाथ के ससुराल और ऋषि सारंग की तपोस्थली से जुड़ा माना जाता है। मंदिर के गर्भगृह में एक ही अर्घे में दो शिवलिंग स्थापित हैं, जिन्हें लोकमान्यता में जीजा और साले का प्रतीक माना जाता है।
मान्यता है कि सावन और भाद्रपद मास में यहां पूजा-अर्चना का विशेष धार्मिक महत्व है।
आयोजन समिति के पदाधिकारियों के अनुसार पालकी यात्रा से लेकर मंदिर परिसर तक विशेष सजावट की जाएगी। पूरे मार्ग को फूलों और रोशनी से सजाया जाएगा। श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को देखते हुए सुरक्षा, दर्शन व्यवस्था, पूजन सामग्री और प्रसाद वितरण के भी विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं।







