Varanasi : जगद्गुरु श्री वल्लभाचार्य महाप्रभु की भव्य शोभा यात्राजतनबड़ से बेटीजी मंदिर तक धूमधाम से निकली

Shekhar Pandey
वाराणसी,13 अप्रैल। श्री शुद्धाद्वैत जप यज्ञ समिति के अध्यक्ष बल्लभ वंशज गोस्वामी श्री कल्याण राय महाराज की अध्यक्षता में जगतगुरु श्री वल्लभाचार्य महाप्रभु जी की भव्य शोभा यात्रा बड़े ही आनंद व उत्साह उमंग के साथ सोमवार को जतनबड़ से चौखंबा वल्लभ गीता श्रीकृष्ण भवन बेटीजी मंदिर तक गाजेबाजे के साथ निकाली गई। ‘‘भगवन मुख से जो प्रकट भए श्रीवल्लभ अवतार, वैश्वानर वल्लभ तेरी जय जय हो…..’’, ’’आनंद के दाता परमानंद बल्लभ तेरी जय जय हो….,’’ इन धूनों को गाते हुए वैष्णवजन केसरिया परिधान अष्टछाप बधाई संकीर्तनों की धुन पर नाचते गाते चल रहे थे। 108 महिलाएं केसरी परिधान में मस्तक पर मंगलकलश लिए हुए वल्लभ बधाई गीत गाते चल रही थी। श्री वल्लभ विद्यापीठ बालिका इंटर कॉलेज की छात्राएं अपनी प्राचार्य के निर्देशन में शोभा यात्रा में चार चांद लग रही थी। शोभा यात्रा में शामिल वैष्णवजनों का स्वागत श्री शुद्धाद्वैत जप यज्ञ समिति के मंत्री बी गुजराती एवं अशोक वल्लभदास ने किया। श्री काशी अग्रवाल समाज, अग्रसेन सेवा संस्थान, भारत भारती परिषद, वल्लभ युवक परिषद, रोटरी क्लब आदि अनेक संस्थाओं द्वारा शोभा यात्रा में शामिल गोस्वामी श्री कल्याण राय महाराज गोस्वामी सुरेश बाबा, श्री वल्लभ बाबा, श्री घनश्याम बाबा सहित वैष्णवजनों का स्वागत कर रहे थे। सुंदर सुसज्जित सुखपाल पर महाप्रभु श्री वल्लभाचार्य का चित्र अपने कंधों पर उठा जय जयकार करते वैष्णवजन चल रहे थे। शोभायात्रा भैरवनाथ, गोलघर, सोराकुआं, बुलानाला, ठठेरी बाजार, भारतेंदु भवन होते हुए सायंकाल 6 बजे श्रीवल्लभगीता श्रीकृष्ण भवन में सभा के रूप में परिवर्तित हुई। विद्ववानों से कहा कि जगतगुरु श्री वल्लभाचार्य महाप्रभु ने काशी में ही वल्लभ संप्रदाय पुष्टिमार्ग की स्थापना कर भारतवर्ष को एक सूत्र में पिरोने और मायावाद का खंडन किया। शुद्धाद्वैत साकार ब्रह्मवाद अर्थात पुष्टिमार्ग का निरूपण वल्लभाचार्य महाप्रभु ने काशी में ही किया। पंडित चंदन कृष्ण शास्त्री ने कहा कि हमारा सौभाग्य है कि काशी में श्री कृष्ण प्रिया बेटी जी के द्वारा स्थापित शुद्धाद्वैत जप यज्ञ समिति में हमें श्रीमद् भागवत कथा का सौभाग्य प्राप्त हुआ, क्योंकि यहीं पर महाप्रभु जी ने भी भागवत किया था और यही महाप्रभु वल्लभाचार्य जी की तीन बैठक है- हनुमान घाट, पंचगंगा घाट और जतनबर। यहां पर नित्य निरंतर सत्संग सेवा का कार्य होता है। गोस्वामी कल्याण राय जी ने वैष्णव को मार्गदर्शन देते हुए कहा कि हम सबके लिए सौभाग्य है कि हम उनके पुष्टिमार्ग के सिद्धांतों पर चलकर अपने जीवन को सार्थक करें। सूरदास, नंददास, पद्मानंद दास, कुम्भनदास, चतुर्भुज दास, कृष्णदास, गोविंद स्वामी आदि अष्ठसखाओं द्वारा गाया हुआ कीर्तन का मधुर गान वैष्णवजन कर रहे थे।











