Varanasi : भीमराव आंबेडकर की 135वीं जयंती पर अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित

Shekhar Pandey
वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंपर्क विभाग द्वारा भारत रत्न भीमराव आंबेडकर की 135वीं जयंती के अवसर पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। “बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर की पत्रकारिता का पुनरावलोकन: सामाजिक न्याय और भारतीय समाज का रूपांतरण” विषय पर आयोजित यह संगोष्ठी ऑनलाइन माध्यम से संपन्न हुई, जिसमें देश-विदेश से लगभग 400 प्रतिभागियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ सर्वधर्म प्रार्थना से हुआ। आयोजन सचिव डॉ. बाला लखेन्द्र ने संगोष्ठी की रूपरेखा प्रस्तुत की, जबकि विभागाध्यक्ष प्रो. ज्ञान प्रकाश मिश्रा ने अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत किया।
उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर के कुलपति प्रो. दिनेश चंद्र राय ने कहा कि भीमराव आंबेडकर ने पत्रकारिता को वंचित और हाशिए पर खड़े लोगों की आवाज बनाने का प्रभावी माध्यम बनाया। उन्होंने ‘मूकनायक’, ‘बहिष्कृत भारत’ और ‘जनता’ जैसे प्रकाशनों के माध्यम से सामाजिक असमानताओं को उजागर किया।
मुख्य वक्ता प्रो. के.जी. सुरेश (पूर्व महानिदेशक, भारतीय जनसंचार संस्थान) ने कहा कि सीमित संसाधनों और सामाजिक अवरोधों के बावजूद आंबेडकर ने पत्रकारिता को जनमत निर्माण का सशक्त उपकरण बनाया। उन्होंने बताया कि 29 वर्ष की आयु में ‘मूकनायक’ के संपादन से उनकी पत्रकारिता यात्रा शुरू हुई, जो आगे ‘बहिष्कृत भारत’, ‘जनता’ और ‘प्रबुद्ध भारत’ तक पहुंची।
नेपाल की पूर्व विदेश मंत्री डॉ. बिमला राय ने कहा कि पत्रकारिता समाज और नीतियों को प्रभावित करने की क्षमता रखती है, इसलिए इसे जिम्मेदार और जवाबदेह होना चाहिए। मलेशिया विश्वविद्यालय की प्रो. शेरोन विल्सन ने वैश्विक संदर्भ में मीडिया की भूमिका पर प्रकाश डाला।
‘कम्युनिकेशन टुडे’ के संपादक प्रो. संजीव भनावत, अंतरराष्ट्रीय जर्नल आईआईएसआर के संपादक प्रो. असित कुमार दास, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के प्रो. ओ.पी. सिंह, आईएमटी भुवनेश्वर के प्रो. श्रीकांत पटनायक, पीआरएसआई वाराणसी के अध्यक्ष अनिल जाजोदिया सहित कई राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय शिक्षाविदों ने अपने विचार व्यक्त किए।
अध्यक्षता करते हुए कला संकाय प्रमुख प्रो. सुषमा घिल्डियाल ने कहा कि समाज एक नाव की तरह है, जिसकी प्रगति सभी वर्गों के संतुलित सहयोग से ही संभव है।
संगोष्ठी में कुल 55 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए, जबकि शेष शोध पत्रों का वाचन आगामी सत्रों में किया जाएगा। समापन सत्र में कुशाभाऊ ठाकरे विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मनोज दयाल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।
कार्यक्रम में यह निष्कर्ष उभरकर सामने आया कि बाबासाहेब आंबेडकर की पत्रकारिता आज भी मीडिया के लिए एक नैतिक मार्गदर्शक है, जो सत्य, साहस और सामाजिक न्याय के मूल्यों को सुदृढ़ करती है।











