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राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस 2026 : विज्ञान, तकनीक और नवाचार से आत्मनिर्भर भारत की ओर बढ़ता देश

Shekhar Pandey

पोखरण से क्वांटम टेक्नोलॉजी तक भारत की वैज्ञानिक यात्रा को नई उड़ान

नई दिल्ली।
हर वर्ष 11 मई को मनाया जाने वाला राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस भारत की वैज्ञानिक क्षमता, तकनीकी आत्मनिर्भरता और नवाचार आधारित विकास यात्रा का प्रतीक बन चुका है। वर्ष 1998 में पोखरण-II परमाणु परीक्षणों की ऐतिहासिक सफलता की स्मृति में मनाया जाने वाला यह दिवस आज “विज्ञान टेक” के रूप में देश के तकनीकी और वैज्ञानिक सामर्थ्य का उत्सव बन गया है।

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केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले एक दशक में भारत का तकनीकी इकोसिस्टम अभूतपूर्व रूप से विकसित हुआ है। क्वांटम संचार, अंतरिक्ष, जैव-प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेमीकंडक्टर, नवीकरणीय ऊर्जा और जलवायु तकनीक जैसे क्षेत्रों में भारत ने उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं।

उन्होंने कहा कि भारत अब केवल तकनीक का उपभोक्ता नहीं, बल्कि वैश्विक नवाचार केंद्र के रूप में उभर रहा है। चंद्रयान-3 मिशन की सफलता, स्वदेशी प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर की उपलब्धि तथा जैव-निर्माण क्षेत्र में तेजी से बढ़ती क्षमता देश की वैज्ञानिक आत्मनिर्भरता को मजबूत कर रही है।

डॉ. सिंह के अनुसार वैश्विक नवाचार सूचकांक में भारत ने बड़ी छलांग लगाई है और 2015 में 81वें स्थान से बढ़कर 2025 में 38वें स्थान पर पहुंच गया है। वहीं, देश में स्वीकृत पेटेंट की संख्या भी तेजी से बढ़ी है। स्टार्टअप इकोसिस्टम में भारत दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल हो चुका है, जहां 1.5 लाख से अधिक मान्यता प्राप्त स्टार्टअप कार्यरत हैं। इनमें बड़ी संख्या कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिक्स और एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग जैसे उभरते क्षेत्रों में काम कर रही है।

उन्होंने बताया कि सरकार की विभिन्न नीतिगत पहलों, जैसे राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (ANRF), बायोई3 नीति और 1 लाख करोड़ रुपये के अनुसंधान एवं नवाचार कोष ने देश में विज्ञान आधारित विकास को नई गति दी है। अब अनुसंधान केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि उद्योग, स्टार्टअप और समाज से जुड़कर आर्थिक एवं सामाजिक परिवर्तन का माध्यम बन रहा है।

राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस के अवसर पर 11 मई 2026 को बीआरआईसी-राष्ट्रीय प्रतिरक्षा विज्ञान संस्थान (NII) में आयोजित राष्ट्रीय प्रदर्शनी में भारत सरकार के 14 मंत्रालयों और विभागों के अंतर्गत विकसित 350 से अधिक स्वदेशी डीप-टेक प्रौद्योगिकियों का प्रदर्शन किया जाएगा। इसमें बायोफार्मा, स्वास्थ्य तकनीक, अंतरिक्ष, जलवायु, कृषि, सेमीकंडक्टर, ऊर्जा और समुद्री प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों की आधुनिक तकनीकों को प्रदर्शित किया जाएगा।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत के तकनीकी विकास के अगले चरण में शिक्षा जगत, उद्योग, स्टार्टअप और सरकार के बीच और अधिक समन्वय की आवश्यकता होगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि विज्ञान और तकनीक की शक्ति विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने में निर्णायक भूमिका निभाएगी।

उन्होंने कहा कि “विज्ञान टेक” केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि भारत की उस वैज्ञानिक सोच का प्रतीक है, जो आत्मनिर्भरता, नवाचार और वैश्विक नेतृत्व की दिशा में देश को लगातार आगे बढ़ा रही है।

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