डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर बोले प्रधानमंत्री मोदी: “भारत की एकता और अखंडता के लिए उनका जीवन सदैव प्रेरणास्रोत”

Shekhar pandey
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनका संपूर्ण जीवन भारत की एकता, अखंडता और राष्ट्रसेवा के प्रति समर्पित रहा। उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी का व्यक्तित्व विद्वता, जनसेवा, साहस और उच्च नैतिक मूल्यों का अद्भुत संगम था, जो आज भी देशवासियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि सुख-सुविधाओं से संपन्न परिवार में जन्म लेने के बावजूद डॉ. मुखर्जी ने राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए त्याग और सेवा का मार्ग चुना। उन्होंने देश के विभाजन के समय पश्चिम बंगाल को भारत का अभिन्न हिस्सा बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और बाद में जम्मू-कश्मीर के पूर्ण एकीकरण के लिए संघर्ष किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि उनका सर्वोच्च बलिदान देश की स्मृति में सदैव अमर रहेगा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्ष 2019 में अनुच्छेद 370 और 35(ए) को हटाया जाना डॉ. मुखर्जी के राष्ट्रवादी संकल्प को सच्ची श्रद्धांजलि है। उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी का स्पष्ट विश्वास था कि भारत की एकता और अखंडता किसी भी परिस्थिति में सर्वोपरि होनी चाहिए।
उन्होंने डॉ. मुखर्जी के शिक्षा क्षेत्र में योगदान का भी उल्लेख करते हुए कहा कि कलकत्ता विश्वविद्यालय के सबसे युवा कुलपति के रूप में उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में अनेक दूरदर्शी सुधार किए। उन्होंने विद्यार्थियों में नेतृत्व क्षमता विकसित करने, शोध को बढ़ावा देने, छात्र कल्याण और खेल गतिविधियों को प्रोत्साहित करने जैसे महत्वपूर्ण कदम उठाए।
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के पहले उद्योग एवं आपूर्ति मंत्री के रूप में डॉ. मुखर्जी ने आधुनिक औद्योगिक भारत की मजबूत नींव रखी। दामोदर वैली कॉरपोरेशन, सिंदरी उर्वरक संयंत्र और औद्योगिक विकास से जुड़ी कई ऐतिहासिक पहल उनके दूरदर्शी नेतृत्व का परिणाम थीं। साथ ही उन्होंने हथकरघा, कुटीर उद्योग और कारीगरों के हितों को भी प्राथमिकता दी।
प्रधानमंत्री ने लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति डॉ. मुखर्जी की प्रतिबद्धता का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने सिद्धांतों से समझौता किए बिना राष्ट्रहित में निर्णय लिए। उन्होंने यह भी कहा कि डॉ. मुखर्जी ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों की हमेशा मजबूती से पैरवी की।
अपने संदेश के अंत में प्रधानमंत्री ने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि विकसित भारत के निर्माण की दिशा में निरंतर कार्य करना ही डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। उन्होंने विश्वास जताया कि देश का युवा वर्ग उनके आदर्शों से प्रेरणा लेकर एक सशक्त, आत्मनिर्भर, एकजुट और संवेदनशील भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।







