सहस्त्र चंडी महायज्ञ के दसवें दिन मां कमलात्मिका की विधिवत आराधना, विशेष आहुतियां अर्पित

Shekhar pandey
वाराणसी। पंचकोशी मार्ग स्थित आदि शंकराचार्य महासंस्थानम में जगद्गुरु शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज के मार्गदर्शन एवं सानिध्य में चल रहे सहस्त्र चंडी महायज्ञ के दसवें दिन दसवीं महाविद्या मां कमलात्मिका (कमला) की विधिवत आराधना की गई। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विशेष पूजन-अर्चन एवं हवन कर मां कमला को विशेष आहुतियां समर्पित की गईं।
दस महाविद्याओं में दसवीं महाविद्या के रूप में पूजित मां कमलात्मिका को समृद्धि, ऐश्वर्य, वैभव, सौभाग्य एवं भौतिक सुख-सुविधाओं की अधिष्ठात्री माना जाता है। कमल पर विराजमान मां कमला शांति, संपन्नता और आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक मानी जाती हैं। महायज्ञ के दसवें दिन उनकी आराधना के माध्यम से विश्व कल्याण, राष्ट्र की समृद्धि, समाज में सुख-शांति तथा श्रद्धालुओं के जीवन में मंगल एवं ऐश्वर्य की कामना की गई।
इस अवसर पर जगद्गुरु शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि सनातन धर्म की साधना परंपरा में महाविद्याओं का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। मां कमला केवल भौतिक संपन्नता की देवी नहीं, बल्कि जीवन में संतुलन, सद्बुद्धि, संतोष और धर्मसम्मत समृद्धि की प्रेरणा भी प्रदान करती हैं। यज्ञ एवं देवी उपासना का मूल उद्देश्य व्यक्तिगत कल्याण के साथ-साथ समस्त प्राणी जगत के कल्याण की भावना को मजबूत करना है।
उन्होंने कहा कि सहस्त्र चंडी महायज्ञ में प्रतिदिन देवी के विभिन्न स्वरूपों की आराधना के माध्यम से शक्ति के विविध आयामों का स्मरण किया जा रहा है। मां कमलात्मिका की उपासना से समाज में सकारात्मक ऊर्जा, सद्भाव और लोकमंगल की भावना का विस्तार हो, यही इस अनुष्ठान की प्रमुख कामना है।
पूजन के दौरान यज्ञ वेदी पर विशेष पूजन सामग्री से मां कमला का आवाहन एवं पूजन किया गया। इसके बाद वैदिक मंत्रों के साथ विधिवत हवन करते हुए विशेष आहुतियां अर्पित की गईं। श्रद्धालुओं ने मां कमलात्मिका के दर्शन-पूजन कर विश्व शांति एवं जनकल्याण के लिए प्रार्थना की।
इस अवसर पर विनय मिश्रा, पन्नालाल मिश्र (भदोही) सपत्नीक, सरोज अग्रवाल (बलिया) सपत्नीक, महंत अवध बिहारी दास, महंत रामेश्वर दास, महंत विद्याभूषण दास, महंत कोतवाल मोहन दास, महंत भगवान दास, बृजभूषणानंद, रामलखन नागा, सच्चिदानंद तिवारी सहित संत-महंत उपस्थित रहे। संत-महंतों ने यज्ञ की परिक्रमा कर आहुतियां अर्पित कीं तथा भगवती देवी का षोडशोपचार विधि से पूजन-अर्चन एवं वंदन किया।
यज्ञाचार्य तेजमणि तिवारी के आचार्यत्व में धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुआ। आयोजन में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर यज्ञ में सहभागिता कर रहे हैं। आगामी दिनों में भी विभिन्न धार्मिक एवं आध्यात्मिक अनुष्ठान वैदिक परंपरा के अनुसार संपन्न होंगे।







