सहस्त्र चंडी महायज्ञ में गूंजे मां तारा के जयकारे, विशेष पूजन-अनुष्ठान संपन्न

Shekhar pandey
वाराणसी। पंचकोशी मार्ग स्थित आदि शंकराचार्य महासंस्थानम में चल रहे सहस्त्र चंडी महायज्ञ के क्रम में मां तारा का विशेष पूजन-अनुष्ठान वैदिक विधि-विधान के साथ संपन्न हुआ। यज्ञाचार्य तेजमणि तिवारी के नेतृत्व में आचार्यों एवं विद्वान ब्राह्मणों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मां तारा का आवाहन, पूजन एवं विशेष आहुतियां अर्पित कीं। इस दौरान लोककल्याण, सुख-शांति और समृद्धि की कामना की गई।
जगद्गुरु शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज ने मां तारा की महिमा बताते हुए कहा कि मां तारा साधक को संकटों से पार लगाने वाली शक्ति हैं। उनकी उपासना से भय और बाधाओं से मुक्ति के साथ आत्मिक शक्ति, ज्ञान और आध्यात्मिक चेतना की प्राप्ति की मान्यता है।
उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा में दशमहाविद्याओं की साधना का विशेष महत्व है। मां तारा को तांत्रिक साधना की प्रमुख देवी माना गया है और उनका एक स्वरूप नील सरस्वती के रूप में भी पूजित है। मां तारा की आराधना साधक को अज्ञान के अंधकार से निकालकर ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाने वाली मानी जाती है।
पूजन के दौरान यज्ञ मंडप में विधि-विधान से विभिन्न संस्कार संपन्न किए गए। श्रद्धालुओं ने मां तारा के दर्शन एवं पूजन कर परिवार की सुख-शांति, आरोग्य और मंगल की कामना की। सहस्त्र चंडी महायज्ञ के चलते यज्ञ परिसर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। वैदिक मंत्रोच्चार और देवी उपासना से पूरा परिसर भक्तिमय बना हुआ है।
पूजन-अनुष्ठान में बृजभूषणानंद, रामलखन नागा, सच्चिदानंद तिवारी सहित अन्य श्रद्धालु एवं साधु-संत उपस्थित रहे।
प्रेषक: विवेकानंद गिरि, देऊरा, काशीपुर







