जैतपुरा शीतला माता मंदिर–पीर बाबा विवाद: मुस्लिम पक्ष ने रखा अपना पक्ष, कहा अदालत का फैसला होगा स्वीकार

Shekhar pandey
वाराणसी। जैतपुरा स्थित शीतला माता मंदिर–पीर बाबा स्थल से जुड़े भूमि विवाद को लेकर मुस्लिम पक्ष ने प्रेसवार्ता कर अपना पक्ष रखा। इस दौरान सफीउर्रहमान अंसारी ने विवादित स्थल के इतिहास और पुराने न्यायालयीन मामलों का हवाला देते हुए घटनाक्रम की जानकारी दी। वहीं, इम्तियाज अहमद अंसारी ने कहा कि मामला न्यायालय में विचाराधीन है और उनका पक्ष किसी भी तरह का विवाद नहीं चाहता।
प्रेसवार्ता में सफीउर्रहमान अंसारी ने दावा किया कि विवादित स्थल करीब 200 वर्ष पुराना कब्रिस्तान है। उनके मुताबिक, वर्ष 1952 के बाद धर्मचंद की ओर से बाबा जउर से संबंधित जमीन पर बने चबूतरे पर पूजा करने की अनुमति मांगी गई थी। उन्होंने कहा कि आपसी सौहार्द बनाए रखने के उद्देश्य से मुस्लिम पक्ष के पूर्वजों ने इसकी अनुमति दी थी। हालांकि, लगभग छह वर्ष बाद जमीन पर मालिकाना हक को लेकर दावे सामने आने लगे, जिसके बाद विवाद बढ़ गया।
सफीउर्रहमान अंसारी ने बताया कि वर्ष 1961 में भूमि विवाद का मामला सामने आया, जो बाद में फौजदारी न्यायालय तक पहुंचा। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 1963 में न्यायालय की ओर से गठित जांच कमेटी ने भूमि से जुड़े तथ्यों की पड़ताल की थी। उनके अनुसार, उस समय दोनों पक्षों के वार्षिक धार्मिक आयोजनों के लिए अलग-अलग अवसर निर्धारित किए गए थे। हालांकि, इन ऐतिहासिक दावों और पुराने न्यायालयीन आदेशों की पुष्टि संबंधित अभिलेखों से होना आवश्यक है।
वहीं, इम्तियाज अहमद अंसारी ने स्पष्ट कहा कि मामला न्यायालय में विचाराधीन है और मुस्लिम पक्ष न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करेगा। उन्होंने कहा, “हम किसी से विवाद नहीं करना चाहते। न्यायालय का जो भी फैसला होगा, हमें मंजूर होगा और हम उसका पालन करेंगे।”
फिलहाल, जैतपुरा के इस विवाद में दोनों पक्षों के दावों, भूमि से जुड़े अभिलेखों और पुराने न्यायालयीन आदेशों की वास्तविक स्थिति महत्वपूर्ण है। मामले में आगे की स्थिति न्यायालय के निर्णय और संबंधित दस्तावेजों के आधार पर स्पष्ट होगी।







