नए भारत के दिल की धड़कनों में बसते हैं बिरसा मुंडा: रंजना चोपड़ा

Nispaksh kashi
भारत जब अपने स्वतंत्रता संग्राम के महान नायकों को याद करता है, तो छोटानागपुर के घने जंगलों से एक नाम दृढ़ नैतिक शक्ति के साथ उभरता है—भगवान बिरसा मुंडा। उन्हें जनजातीय समाज में ‘धरती आबा’ यानी भूमि के रक्षक के रूप में सम्मानित किया जाता है। वे केवल एक स्वतंत्रता सेनानी ही नहीं, बल्कि जनजातीय अस्मिता, सम्मान और प्रतिरोध के जीवंत प्रतीक भी हैं।
लेखिका श्रीमती रंजना चोपड़ा के अनुसार बिरसा मुंडा का जीवन दर्शन जनजातीय पहचान की रक्षा, समानता की स्थापना और विकास के न्यायपूर्ण वितरण पर आधारित था। यही विचार आज भी विकसित भारत की यात्रा को दिशा दे रहे हैं।
विरासत को मिला राष्ट्रीय सम्मान
बिरसा मुंडा की स्मृति जनजातीय समुदायों की परंपराओं और लोककथाओं में जीवित है। वर्ष 2021 में सरकार ने उनके जन्मदिवस 15 नवंबर को ‘जनजातीय गौरव दिवस’ घोषित किया। इसके बाद 2024–25 को ‘जनजातीय गौरव वर्ष’ के रूप में मनाया गया, जिसमें देशभर में 2 लाख से अधिक कार्यक्रम आयोजित हुए और 3 करोड़ से अधिक लोगों की भागीदारी रही।
इन आयोजनों के माध्यम से जनजातीय संस्कृति, खेल, साहित्य और परंपराओं को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली।
जनजातीय नायकों की पहचान की पहल
देशभर के जनजातीय अनुसंधान संस्थान (TRI) 222 जनजातीय भाषाओं के दस्तावेजीकरण और सांस्कृतिक संरक्षण के कार्य में जुटे हैं। साथ ही 10 राज्यों में 11 जनजातीय स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय विकसित किए जा रहे हैं, जिनमें रांची में बिरसा मुंडा और नवा रायपुर में वीर नारायण सिंह को समर्पित संग्रहालय शामिल हैं।
शिक्षा और सशक्तिकरण
इस वर्ष छात्रवृत्ति योजनाओं के तहत 26 लाख से अधिक जनजातीय छात्रों को सहायता दी गई है, जिनमें 56% से अधिक छात्राएं शामिल हैं। एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों की संख्या 167 से बढ़कर 723 हो गई है, जिससे जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा का दायरा तेजी से बढ़ा है।
महिला सशक्तिकरण
लगभग 5.2 करोड़ जनजातीय महिलाएं समाज की रीढ़ हैं। वन धन विकास केंद्रों के माध्यम से लाखों लोग लाभान्वित हो रहे हैं, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हैं। यह पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था और आत्मनिर्भरता को मजबूत कर रही है।
विकसित भारत की दिशा में योगदान
आज 10.5 करोड़ से अधिक जनजातीय नागरिक देश के विकास में सक्रिय भागीदार हैं। ‘धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान’ और ‘प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महा अभियान’ जैसी योजनाएँ जनजातीय समाज को मुख्यधारा से जोड़ रही हैं।
रंजना चोपड़ा के अनुसार, बिरसा मुंडा की विरासत आज भी नए भारत की आत्मा में जीवित है और समावेशी विकास की दिशा में मार्गदर्शन कर रही है।







