अशोक सिंघल की जन्म शताब्दी पर हुआ आयोजन, उनके विचारों को आत्मसात करने का आह्वान

Shekhar pandey
वाराणसी। विश्व हिंदू परिषद के वरिष्ठ नेता एवं राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख स्तंभ रहे अशोक सिंघल की जन्म शताब्दी के अवसर पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में उनके जीवन, संगठनात्मक कार्यों और हिंदू समाज के लिए किए गए योगदान को याद किया गया। मुख्य अतिथि जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज ने अशोक सिंघल के विचारों को वर्तमान समय में भी प्रासंगिक बताया।
जगद्गुरु शंकराचार्य ने कहा कि अशोक सिंघल ने हिंदू समाज के जागरण और अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन को व्यापक स्तर तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने समाज के विभिन्न वर्गों को जाति, भाषा और क्षेत्रीय भेदभाव से ऊपर उठकर एकजुट करने का प्रयास किया।
उन्होंने कहा कि अशोक सिंघल का पूरा जीवन संगठन, सामाजिक समरसता और हिंदू समाज में आत्मविश्वास पैदा करने के लिए समर्पित रहा। उनके विचारों को आगे बढ़ाकर समाज में एकता और समरसता को और मजबूत किया जा सकता है।
शंकराचार्य महाराज ने समान शिक्षा नीति, गोहत्या पर प्रतिबंध, गंगा की अविरलता एवं निर्मलता और मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने जैसे विषयों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन मुद्दों को लेकर अशोक सिंघल लगातार समाज को जागरूक करते रहे।
उन्होंने धर्मांतरण के मुद्दे पर भी सामाजिक जागरूकता और प्रभावी कानून की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सनातन समाज को जाति, भाषा और प्रांत के भेद से ऊपर उठकर अपनी सांस्कृतिक एवं धार्मिक पहचान के संरक्षण के लिए संगठित होकर कार्य करना चाहिए।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत प्रचारक रमेश जी ने अशोक सिंघल के जीवन के विभिन्न पक्षों पर प्रकाश डाला। उन्होंने उनके संगठन कौशल, सामाजिक समर्पण और हिंदू समाज के लिए किए गए कार्यों को विस्तार से बताया।
कार्यक्रम में बार एसोसिएशन के राधे मोहन, विश्व हिंदू परिषद के सैकड़ों कार्यकर्ता, क्षेत्र के प्रधान, प्रमुख, ब्लॉक प्रमुख, पूर्व विधायक सहित बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक एवं गणमान्य लोग मौजूद रहे।
कार्यक्रम का संचालन विश्व हिंदू परिषद के पवन देव ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन विधायक सुशील सिंह ने किया।







