खाद्य हानि से खाद्य नेतृत्व की ओर: दक्षिण एशिया के लिए खाद्य प्रसंस्करण बना बड़ा अवसर — चिराग पासवान

Nispaksh kashi
दक्षिण एशिया खाद्य प्रणालियों के एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है, जहाँ कृषि क्षेत्र की विशाल क्षमता के बावजूद कटाई के बाद होने वाली हानि और कमजोर आपूर्ति श्रृंखलाएँ किसानों की आय, रोजगार और पोषण पर असर डाल रही हैं। केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान ने अपने लेख में कहा कि खाद्य प्रसंस्करण इस क्षेत्र के लिए सबसे बड़ा परिवर्तनकारी अवसर बन सकता है।
उन्होंने कहा कि भारत दूध और दालों का विश्व का सबसे बड़ा उत्पादक तथा फल और सब्जियों का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक होने के बावजूद भंडारण, लॉजिस्टिक्स और प्रसंस्करण की कमियों के कारण बड़ी मात्रा में खाद्य हानि का सामना कर रहा है। इसे केवल नुकसान नहीं, बल्कि एक “चूका हुआ आर्थिक अवसर” बताया गया है।
पासवान ने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण मूल्यवर्धित कृषि की कुंजी है, जो किसानों को बाजार, उद्योग और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं से जोड़ता है। वर्तमान में भारत में केवल लगभग 17% कृषि उपज का प्रसंस्करण होता है, जिसे 2030 तक 25% तक बढ़ाने का लक्ष्य होना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि खाद्य प्रसंस्करण से न केवल खाद्य सुरक्षा और भंडारण क्षमता बढ़ती है, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा होते हैं, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में युवाओं और महिलाओं के लिए।
लेख में यह भी उल्लेख किया गया कि भारत की प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना, पीएम सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण योजना और उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजनाएँ इस क्षेत्र को मजबूत आधार दे रही हैं।
वैश्विक बाजारों की मांग को देखते हुए मंत्री ने कहा कि अब समय कच्चे कृषि निर्यात से आगे बढ़कर उच्च मूल्य वाले प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के निर्यात का है।
उन्होंने स्थिरता पर जोर देते हुए कहा कि खाद्य हानि में कमी से पर्यावरणीय संसाधनों पर दबाव घटेगा और अपशिष्ट से मूल्य सृजन के नए अवसर मिलेंगे।
अंत में उन्होंने कहा कि दक्षिण एशिया यदि नीति, निवेश और साझेदारी के सही संयोजन के साथ आगे बढ़े तो यह क्षेत्र “खाद्य हानि से खाद्य नेतृत्व” की ओर अग्रसर हो सकता है।







