पूज्य मां श्री सर्वेश्वरी सेवा संघ द्वारा श्री गुरु पूर्णिमा महोत्सव बड़े ही धूमधाम से मनाया गया

Ashutosh pandey
चंदौली । गुरु पूर्णिमा महोत्सव हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी पूज्य माँ श्री सर्वेश्वरी सेवा संघ, जलीलपुर, पड़ाव के प्रांगण में बड़े धूमधाम से मनाया गया। आज प्रातः 5 बजे से श्रमदान, कलश यात्रा, ध्वजारोहण, गंगा स्नान के उपरांत कलश यात्रा निकाली गई जो “अघोरान्ना परो मंत्र: नास्ति तत्त्वं गुरो:परम्” का जाप करते हुए परम पूज्य श्री अघोरेश्वर महाप्रभु के चरण पादुका तक पहुचकर सम्पन्न हुई। इसके बाद परम पूज्य श्री अघोरेश्वर महाप्रभु के शिष्य पूज्य श्री गुरु बाबा जी और बाबा श्री अनिल रामजी के द्वारा हवन- पूजन किया गया जिसके उपरांत ध्वजा पूजन और गुरु दर्शन का कार्यक्रम चलता रहा। विभिन्न स्थानों से आये श्रद्धालुओं ने गुरु चरणों मे श्रद्धा सुमन अर्पित कर उनका आशीष प्राप्त किया। दिन में विशाल भंडारे का कार्यक्रम चलता रहा और सांयकाल अघोरेश्वर गुरुकुल के बच्चों ने सांस्कृतिक एवं रंगारंग कार्यक्रम की प्रस्तुति दी। इस अवसर पर सांयकाल विचार-गोश्ठी में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए पूज्य श्री गुरु बाबाजी ने अपने आशीर्वचन में कहा कि गुरु पूर्णिमा अघोर परंपरा का सर्वाधिक महत्वपूर्ण पर्व है। अघोर परंपरा में गुरु की सर्वोच्च महत्ता की परंपरा को प्राचीन कल से अब तक जिवंत रखा गया है। इस अवसर पर अवघड़ साधक अपने सांसारिक एवं आध्यात्मिक गुरु के प्रति श्रृद्धा सुमन अर्पित करते है। ‘ शिव महिमन स्तोत्र ‘ में वर्णित अघोर मंत्र से यह ज्ञात होता है की गुरुनाम ही सर्वोच्च मंत्र है और गुरु के मूल तत्व से बढ़कर कोई तत्व नहीं है। वह अवघड़ साधक जो गुरु के प्रति पूर्ण श्रद्धा भाव से समर्पित है और उनके द्वारा बताये हुए वाणी और मार्ग का अनुसरण करता है , ऐसा साधक गुरु रुप के मूल तत्व का अनुभव करता हैं। जब गुरु अपने शिष्य से पूर्ण रूप से प्रस्सन होता है तब उसे अपनी कृपा से अनुग्रहित करता है। अघोर परंपरा में ऐसा विश्वास है की केवल गुरु की कृपा से ही हम ईश्वरीय तत्व का बोध प्राप्त कर सकते है और परम ज्ञान की प्राप्ति भी करते है। गुरु की कृपा के द्वारा ही हम उस महान कपालेश्वर की कृपा भी प्राप्त कर सकते है। एक बार जब उस महान कपालेश्वर की कृपा शिष्य पे हो जाती है तब उसके भीतर संसार में किसी अन्य चीज़ की कोई इच्छा नहीं रह जाती । गुरु एवं कपालेश्वर की कृपा हो जाने से साधक अनेक प्रकार के आध्यात्मिक शक्तिया अर्जित कर लेता है। जीवन के अनेक प्रश्नो का उत्तर उसे प्राप्त हो जाता है और उस औघड़ साधक को परम ज्ञान प्राप्त हो जाता है। इन कारणो से अवघड़ साधक गुरु पूर्णिमा महोत्सव को बहुत ही उच्च स्थान प्रदान करते है। इस अवसर पर मुख्य रूप से डॉ. हर्ष वर्धन सिंह, डॉ. आर के सिंह, डॉ पी के सिंह, अधिवक्ता बी एन सिंह, डॉ अशोक मिश्र, ओम प्रकाश सिंह, डॉ. राजेश चौहान, प्रशांत कुमार तिवारी, एवं अघोरेश्वर गुरुकुल के बच्चे एवं शिक्षक गण उपस्थित थे। रिपोर्ट,राजकुमार







